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मप्र में अध्यात्म की अध्येता राजयोगिनी अवधेश दीदी नहीं रहीं

 

 

–  0 ब्रह्माकुमारीज़ भोपाल जोन की निदेशिका 75 वर्षीय राजयोगिनी अवधेश दीदी का देवलोकगमन*
– 0 ब्रह्माकुमारीज़ के संस्थापक ब्रह्मा बाबा से मिलने के बाद समाज सेवा में समर्पित कर दिया था अपना जीवन*
– 0 आपके सान्निध्य में 500 बेटियों ने विश्व कल्याण में समर्पित किया जीवन*
– *मप्र एवं उप्र में 300 से अधिक सेवाकेंद्रों की रखी नींव

भोपाल। मप्र में ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा अध्यात्म का बीजारोपण करने वाली, भोपाल जोन की संस्थापक 75 वर्षीय राजयोगिनी अवधेश दीदी नहीं रहीं। उन्होंने 19 सितंबर को बंसल हॉस्पिटल भोपाल में इलाज के दौरान दोपहर 12.15 बजे अंतिम सांस ली। दो दिन से वह वेंटिलेटर पर थीं और पिछले एक साल से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही ब्रह्माकुमारीज़ परिवार में शोक की लहर है। हजारों ब्रह्माकुमार भाई-बहनें उनकी आत्मा की शांति के लिए राजयोग साधना कर रहे हैं। उनकी बैकुंठी यात्रा 20 सितंबर शनिवार को सुबह 11 बजे ब्रह्माकुमारीज़ के जोनल मुख्यालय अरेरा कॉलोनी राजयोग भवन से निकलेगी। अंतिम संस्कार सुभाष नगर स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा।
जन्म 16 अगस्त, 1950 में उप्र के आगरा के शमसाबाद में जन्मी राजयोगिनी अवधेश दीदी में बचपन से ही भक्तिभाव के संस्कार थे। उनकी भगवान में अटूट आस्था, श्रद्धा और विश्वास देख माता-पिता ने सोच लिया था कि यह बच्ची साध्वी बनेगी। आपकी बचपन से ही समाजसेवा और देशप्रेम में रुचि रही। अध्यात्म के प्रति अटूट लगन के चलते उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज कल्याण, समाजसेवा और विश्व कल्याण के कार्य में अर्पित कर दिया। वर्ष 2010 में आपको किरण लाइफ टाइम सम्मान से सम्मानित किया गया, जो कि एक राष्ट्रीय महिला उत्कृष्ट पुरस्कार है। यह वुमन इंटरनेशन नेटवर्क, इंडिया निर्माण केन्द्र एवं योग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा मानव मात्र की सेवा के लिए संयुक्त रूप से प्रदान किया गया था।

ब्रह्मा बाबा से मिलने के बाद बदली जीवन की दिशा-
वर्ष 1965 में आप आगरा में पहली बार ब्रह्माकुमारीज़ के संपर्क में आईं। इसके बाद संस्थान के नियमित विद्यार्थी के रूप में राजयोग की पढ़ाई शुरू कर दी। प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती से आप खासी प्रभावित रहीं। वर्ष 1968 में पहली बार माउंट आबू में ब्रह्माकुमारीज़ के संस्थापक ब्रह्मा बाबा से मिलीं। बाबा के तपस्वी और प्रेरक जीवन से इतनी प्रभावित हुईं कि उसी क्षण ब्रह्मचर्य का व्रत का संकल्प लेते हुए आजीवन अध्यात्म के मार्ग पर चलने का संकल्प ले लिया। इसके बाद वह ब्रह्मा बाबा के निर्देशानुसार भोपाल पहुंचीं जहां से पूरे प्रदेश में अध्यात्म का संदेश पहुंचाया।

500 बेटियां बनीं ब्रह्माकुमारी, 300 सेवाकेंद्र खोले-
अवधेश दीदी की ममतामयी पालना, अथक मेहनत, लगन और परिश्रम का कमाल है कि आपने मप्र और उप्र के विभिन्न जिलों में 300 से अधिक सेवाकेंद्रों की स्थापना की। इन सेवाकेंद्रों के माध्यम से एक लाख से अधिक लोग अध्यात्म के पथ पर चलते हुए अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। साथ ही इन सेवाकेंद्रों पर आपके मार्गदर्शन में 500 से अधिक बेटियों ने अपना जीवन समाजसेवा में समर्पित किया।
वर्तमान में आप मप्र की क्षेत्रीय निदेशिका के साथ प्रशासक सेवा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका भी थीं। आपने विभिन्न अध्यात्मिक एवं सामाजिक विषयों पर मुख्य वक्ता के रूप में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों को संबोधित किया है। आपके नेतृत्व में 500 से भी अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आयोजन किया गया।

प्रदेश में महिला सशक्तिकरण से लेकर किसानों के लिए कार्य किया-
राजयोगिनी अवधेश दीदी ने प्रदेशभर में महिला सशक्तिकरण से लेकर नशामुक्ति, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के लिए कार्य किया है। आपके नेतृत्व में प्रदेश में सैकड़ों नशामुक्ति और किसान सशक्तिकरण अभियान निकाले गए। साथ ही प्रशासनिक सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अनेक तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं आयोजित की गईं।

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