Ro no D15139/23

लोककला की अमर स्वर-सरिता को राजकीय सम्मान: पद्म विभूषण तीजन बाई को अश्रुपूरित विदाई

पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका का पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; हजारों लोगों ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

 

रायपुर, 5 जुलाई 2026 (IMNB NEWS AGENCY) छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया।

 

डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।

 

ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।

 

भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया।

 

राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया।

 

डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

  • Related Posts

    कांग्रेसी झूठे नैरेटिव सेट कर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है: अनुराग सिंहदेव

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने त्वरित निर्णय करते हुए 66 कब्जाधारियों को आवास मुहैया कराया, नवा रायपुर के सेक्टर 30 में 1200 परिवार पहले से निवासरत है जहां सभी आवश्यक सुविधाएं…

    Read more

    जिले में 05 जुलाई को 268.4 मिमी औसत वर्षा

    जशपुरनगर 05 जुलाई 2026/ जशपुर जिले में 01 जून से 05 जुलाई 2026 तक 1531.7 मिमी औसत वर्षा हो चुकी है। जिले में बीते 10 वर्षों की तुलना में 05…

    Read more

    NATIONAL

    पलामू में उपायुक्त की पहल पर जर्जर स्कूल बना आधुनिक मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, DSWO ने किया उद्घाटन

    पलामू में उपायुक्त की पहल पर जर्जर स्कूल बना आधुनिक मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, DSWO ने किया उद्घाटन

    भारतीय सेमीकंडक्टर चिप लॉन्च : पीएम ने जमशेदपुर की तनीषा को सराहा, बोले- झारखंड की बेटियों ने सबसे अधिक प्रभावित किया

    भारतीय सेमीकंडक्टर चिप लॉन्च : पीएम ने जमशेदपुर की तनीषा को सराहा, बोले- झारखंड की बेटियों ने सबसे अधिक प्रभावित किया

    सांसद संजय जायसवाल का बड़ा बयान, ‘पाकिस्तान तय करे आतंकवाद चाहिए या पानी’

    सांसद संजय जायसवाल का बड़ा बयान, ‘पाकिस्तान तय करे आतंकवाद चाहिए या पानी’

    पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमर आवाज़ हुई शांत

    पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमर आवाज़ हुई शांत

    प्रधानमंत्री ने पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन पर शोक व्यक्त किया

    प्रधानमंत्री ने पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन पर शोक व्यक्त किया

    ममता बनर्जी की जनहित योजनाओं को बंद नहीं करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार, लाभार्थियों की होगी सघन जांच

    ममता बनर्जी की जनहित योजनाओं को बंद नहीं करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार, लाभार्थियों की होगी सघन जांच