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लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को दबाना समाधान नहीं — मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी

 

 

लखनऊ | 19 जुलाई 2026

लखनऊ के भारतीय ट्वेल्वर शिया इस्लामी विद्वान, वक्ता एवं लेखक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम चिकित्सकीय सलाह और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर उठाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है।

मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवाद, न्याय और जनविश्वास से आती है, न कि टकराव से।

उन्होंने कहा,

“यदि देश का युवा शिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता और अपने अधिकारों की बात कर रहा है, तो उसकी आवाज़ को सुना जाना चाहिए। लोकतंत्र में संवाद का स्थान हमेशा बल प्रयोग से ऊपर होना चाहिए।”

मौलाना ज़ैदी ने हाल के दिनों में युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी Cockroach Janta Party (CJP) तथा उसके संस्थापक अभिजीत डिपके का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन का मूल्यांकन उसके उठाए गए मुद्दों और उसके शांतिपूर्ण आचरण के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल उसके नाम या लोकप्रियता के आधार पर। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद अभिजीत डिपके ने आंदोलन जारी रखने और स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की।

उन्होंने कहा,

“मैं किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं उस हर आवाज़ के साथ खड़ा हूँ जो संविधान के दायरे में रहकर शिक्षा, न्याय, ईमानदारी और युवाओं के भविष्य की बात करती है।”

मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि आज भारत का सबसे बड़ा प्रश्न केवल राजनीति नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं का भविष्य है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सरकार से अपील की कि वे मतभेदों का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से करें।

उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे विरोध दर्ज कराते समय शांति, अनुशासन और कानून का सम्मान बनाए रखें, क्योंकि स्थायी परिवर्तन संयम और लोकतांत्रिक भागीदारी से ही आता है।

अपने संदेश के अंत में मौलाना ज़ैदी ने कहा,

“मुल्क तब मजबूत होता है जब उसकी सरकार जनता की सुनती है और जनता कानून का सम्मान करती है। लोकतंत्र में जीत किसी एक पक्ष की नहीं, बल्कि संवाद और न्याय की होनी चाहिए।”

 

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