
कोरबा 24 फरवरी 2026/यह कहानी बालक सूरज (परिवर्तित नाम) के संघर्ष, धैर्य और विभाग के सतत प्रयासों की है, जिसने एक अकेले बच्चे को समाज की मुख्यधारा और एक सुरक्षित परिवार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक संघर्ष और संरक्षण
सूरज का जीवन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से होकर गुज़रा। मात्र चार वर्ष की आयु में पारिवारिक स्थितियों के कारण उसे त्याग दिया गया था। पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए जाने के बाद बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार उसे मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत सेवा भारती मातृछाया (विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरण) में संरक्षण प्रदान किया गया।
माता-पिता के स्नेह और पारिवारिक माहौल से वंचित होने के कारण शुरुआती समय उसके लिए बेहद कठिन रहा, लेकिन संस्था ने उसे सुरक्षा, स्नेह और देखभाल देने में कोई कमी नहीं आने दी।
उपचार और व्यक्तित्व विकास
संस्था में रहते हुए सूरज को स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुशासन के साथ एक संतुलित वातावरण मिला। चिकित्सकीय जांच में पाया गया कि उसे बोलने में कठिनाई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की सलाह के आधार पर उसे स्पीच थैरेपी, बेरा टेस्ट और बोन टेस्ट जैसी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं प्रदान की गईं।
लगातार उपचार, देखभाल और मार्गदर्शन से उसके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आए। वह पढ़ाई में रुचि लेने लगा और अनुशासनप्रियता के कारण अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन गया।
दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया
जब व्यापक खोजबीन और विज्ञापन के बाद भी उसके जैविक अभिभावकों का पता नहीं चला, तो बाल कल्याण समिति ने उसे ‘लीगल फ्री’ घोषित किया। संबंधित सभी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए गए।
सूरज की आयु छह वर्ष पूर्ण होने पर उसे बड़े बच्चों के बालगृह में स्थानांतरित किया गया। दत्तक प्रक्रिया के अंतर्गत शुरू में दो परिवारों ने उसकी चिकित्सकीय जरूरतों को देखते हुए रेफरल अस्वीकार कर दिया। लेकिन अंततः छत्तीसगढ़ राज्य के ही एक एकल अभिभावक ने उसे स्नेहपूर्वक अपनाने की इच्छा जताई और आगे की सारी प्रक्रिया पूर्ण की।
नया जीवन और सुरक्षित भविष्य
सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद माननीय न्यायालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, कोरबा द्वारा बालक के सर्वोत्तम हित में दत्तक ग्रहण आदेश जारी किया गया। संस्था ने सूरज का जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर उसे नए अभिभावक को विधिवत सौंप दिया।
आज सूरज अपने नए परिवार में सुरक्षित, स्नेह से भरा और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहा है। विभाग द्वारा विगत एक माह में एक अन्य बच्चे को भी विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर दत्तक परिवार से जोड़ा गया है।
सूरज की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील प्रयास, उचित संरक्षण और प्रेम से किसी भी बच्चे का जीवन एक नई दिशा ले सकता है।








