Monday, June 17

छत्तीसगढ़ के पूज्य सिंधी पंचायतों का मुखिया सम्मेलन संपन्न

 

पूज्य पंचायतों के पुनर्गठन के साथ कई विसंगतियों पर भी हुई चर्चा 
रायगढ़।  छत्तीसगढ़ के पूज्य सिंधी पंचायतों के मुखिया (अध्यक्षों ) का सम्मेलन तिल्दा नेवरा में संपन्न हुआ।  जिसमें छत्तीसगढ़ के तमाम जिलों में जहां-जहां भी सिंधी परिवार रहते हैं वहां पर सिंधी पंचायतों के भौगोलिक क्षेत्राधिकार के अनुसार पंचायतों का पुनर्गठन होने तथा सिंधी समाज मेंआधुनिकता की दौड़ में हो रही कुछ ऐसी नई परंपराओं पर अंकुश लगाने , पूज्य पंचायतों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के विषय में प्राप्त प्रस्तावों पर खुलकर चर्चा हुई। प्रथम सत्र में पूज्य मांढर वाली माता के मुख्य आतिथ्य तथा छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी के अध्यक्षता में भगवान श्री झूलेलाल जी की आरती और प्रार्थना के साथ दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का आगाज किया गया।  तत्पश्चात पूज्य मांढर वाली माता ने अपने श्रीमुख से उपस्थित सदस्यों और छत्तीसगढ़ के समस्त सिंधी भाई बहनों के लिए अपने आशीर्वचन प्रदान किए। इसके बाद वर्तमान अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद अन्य वक्ताओं को समय दिया गया कि वह अपने विचार रखें  जिसमें छत्तीसगढ़ के कोने कोने से आए मुखिया एवं अन्य पदाधिकारियों ने बहुत अच्छे सुझाव रखे। सर्वसम्मति से 22 वर्ष पूर्व बने संविधान में आवश्यक संशोधन का निर्णय लिया गया। यह निर्णय किया गया कि प्रदेश का प्रत्येक सिंधी परिवार भौगोलिक रूप से जिस पंचायत के क्षेत्राधिकार में निवास करता है उससे वह आवश्यक रूप से जुड़े साथ ही वह अपने पूर्वजों के सिंध के क्षेत्राधिकार में जिस जिले से अपनी पहचान रखता है जैसे दादू, खानपुर, शिकारपुर, साहिती इत्यादि उनकी पंचायतों में भी रह सकता है। यह तमाम  सिंधी पंचायतें छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत से जोड़ी जाएंगी और फिर छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के सामान्य सभा में जो निर्णय पास किए जाएंगे वह पूरे प्रदेश में हर पंचायत स्तर पर लागू होंगे। हर 3 माह में मुखिया गण का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें प्रशिक्षण सत्र भी शामिल होंगे। इसके अलावा प्रतिवर्ष आमसभा में विभिन्न पंचायतों के कार्यों की रिपोर्ट पढ़ी जाएगी एवं श्रेष्ठ मुखिया को सम्मानित किया जाएगा।यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक पंचायत में हर 3 वर्ष में सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा।  विपरीत परिस्थिति में चुनाव के द्वारा नई कार्यकारिणी का गठन होगा जिसमें छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के पर्यवेक्षक भी वहां उपस्थित रहेंगे।  इस सम्मेलन में रायगढ़ से पूज्य पंचायत दादू के कार्यकारी अध्यक्ष हीरा मोटवानी ने अपनी भागीदारी निभाई उन्होंने सदन में अपने विचार और सुझाव भी प्रस्तुत किए जिसमें उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत का अध्यक्ष छत्तीसगढ़ के किसी अन्य स्थान से निर्वाचित होना अव्यवहारिक होगा क्योंकि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है सारे मुख्यालय रायपुर में है सारे प्रशासनिक काम रायपुर से ही कराने होते हैं यदि कोई वीआईपी आते है तो उनके कार्यक्रमों के लिए भी अध्यक्ष का रायपुर में रहना अनिवार्य होता है ऐसे में छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत का अध्यक्ष प्रयपुर का ही होना उचित लगता है।  हां बाकी सभी स्थानों को पूज्य प्रदेश पंचायत में  प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और वह मिलता भी है।  जिस पर यह घोषणा की गई की प्रत्येक जिले से एक प्रदेश उपाध्यक्ष और एक प्रदेश सचिव बनाया जाएगा साथ ही प्रत्येक सिंधी पंचायत के मुखिया स्वयमेव ही कार्यकारिणी के सदस्य भी रहेंगे। तिल्दा का यह सम्मेलन अत्यंत यादगार रहेगा क्योंकि पूज्य पंचायत टिल्डा ने बहुत ही उम्दा इंतजाम किए थे अत्यंत ही विनम्र और सेवा भाव से भरे टिल्डा के लोगों ने सभी के हृदय में अपनी एक छाप छोड़ी है।अंत में सभी अतिथियों और पूज्य पंचायत के उपस्थित मुखी जनों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से पधारे सैकड़ों सिंधी भाई बहन और पूज्य पंचायत के मुखिया गण,तथा छ ग  सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और पदाधिकारी शामिल थे।अगला सम्मेलन दल्ली राजहरा की पूज्य पंचायत के आतिथ्य में आयोजित होगा।

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