
*दो बातें, बेहद महत्वपूर्ण। एक तो ये कि ‘चाणक्य ने कहा था कि कोई विदेशी मां का बेटा कभी भारत के प्रति वफादार नहीं हो सकता’। दूसरी बात जो आम बोलचाल में हमारे देश में बोली जाती है और इस पर विश्वास किया जाता है ये कि ‘हमारे देश में रसूखदारों को कभी सजा नहीं होती’।*

चाणक्य ने जो सदियों पहले कहा था वो आज एक बार फिर सही साबित हो रहा है। राहुल के क्रियाकलाप हमेशा से देश के विरूद्ध ही नजर आते रहे हैं। कुछ बातें बेहद आहत करती हैं जैसे चाईना के साथ इस परिवार की कानाफूसी, आतंकियों के मारे जाने पर सोनिया गांधी के आंसू, कभी उनकी सरकार के मंत्री का नकली नोट बनाने के मामले में पाकिस्तान को नोटों की ओरिजनल डाई मुहैया कराना।
ये कुछ उदाहरण हैं। ऐसे गिनेंगे तो ग्रंथ भर जाएंगे।
यदि हम ऐसा कोई काम ढूंढना चाहें जो कांग्रेस ने देशवासियों के हित में किया हो तो शायद नहीं मिलेगा। मिलेगा तो केवल एक वर्ग विशेष के हित के लिये।
*इसके ठीक विपरीत लगभग 12 साल पूर्व जो एक अल्पसंख्यक बिल लाने को कांग्रेस उत्सुक थी, वो अगर लागू हो जाता तो आज हिंदुओं के गले मे फांसी का फंदा नजर आता, हिंदु गुलाम और मजदूर नजर आता या मौत को गले लगा लेता।*
बिल का नाम अक्षरशः यही नहीं है और उसके प्रस्ताव भी अक्षरशः ऐसे नहीं होंगे पर बातें कुछ ऐसी ही थीं
*इस बिल में कुछ ऐसी व्यवस्था थी कि अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक की लड़ाई में अल्पसंख्यक की बात को सही माना जाएगा और वो झूठ बोल रहा है या बहुसंख्यक को साबित करना होगा। आमतौर पर आरोप लगाने वाले को साबित करना होता है यहां उल्टा प्रस्ताव था कि आरोपी को साबित करना होगा कि वो अपराधी नहीं है।*
सिर्फ यही नहीं ऐसे कई प्रस्ताव थे जिनसे हिंदु गुलामी का जीवन जीने की प्रताड़ना झेलता।
दोहरी नागरिकता
राहुल ने इस ताजा मामले मे देश को क्लीयर धोखा दिया है। उन्होंने दो देशों की नागरिकता हासिल कर रखी है।
सबसे पहले उन पर ये आरोप सुब्रमण्यम स्वामी ने लगाया था। राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं और नियम विरूद्ध भारत की नागरिकता भी हासिल कर रखी है, लंदन में उनका घर है, वहां उनकी कंपनी भी है, आदि….. ।
आगे चलकर स्वामी तो ठण्डे पड़ गये पर देश का सौभाग्य कि एक भाजपा कार्यकर्ता और संध के स्वयंसेवक विग्नेश शिशिर ने इसी संबंध में याचिका दायर कर दी।
अफसोस
*इस बात को सुनकर जानकर बेहद अफसोस होता है कि विग्नेश जैसे इंसान को जिन्हें आम आदमी नहीं कहा जा सकता, जान के खतरे से जूझना पड़ा, उनकी ही सरकार ने उन्हें उचित संरक्षण नहीं दिया। धीमी लापरवाह नौकरशाही से वे जूझते दिखे। रसूखदारों के प्रति न्यायालयों के नरम रूख और अन्य कुव्यवस्थाओं का सामना करते दिखे। अकेले डटे रहे*। और आखिरकार देशहित में सच की पताका फहरा ही दी।
राहुल की बात करें तो बेपरवाह उद्दण्डता इतराते, एक्शन मारते, खुद को बिंदास, बेपरवाह काॅलेज स्टूडेन्ट जैसा व्यवहार करते राहुल गांधी बेहद गैर जिम्मेदाराना तरीके से देश की राजनीति में सुविधाजनक ढंग से हिस्सा लेते रहे।
जहां मजा आया, जहां नाम हुआ, जहां मसखरी करनी थी, वहां अपना प्रेजेन्टेशन दिया और सरकार को कटघरे में खड़ा किया और सरकार जवाब दे इससे पहले की भाग खड़े हुए। न तथ्यों को सुना, न समझने का प्रयास किया। न किसी निर्णय तक पहुंचे। यानि कुल मिलाकर जनता के किसी मुद्दे पर कभी गंभीर नहीं हुए। राजनीति एक साईड इंटरटंेटमेंट की रही उनके जीवन में।
आरोप लगाओ
माफी मांगो
एक-दो बार नहीं
कई बार राहुल गांधी को कोर्ट से फटकार लगी। एक बार मोदी नाम वाले सारे चोर क्यों होते हैं कहने पर उन्हें सजा हो गयी थी और लोकसभा की सदस्यता चली गयी थी। बाद मे सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सदस्यता बहाल की।
एक 2018 का मामला अमित शाह को हत्यारा बोलने का है जिसमें वकील उन्हें लंबा करने का मशवरा दे रहे हैं। लेकिन सुलतानपुर एमपीएमएलए कोर्ट ने चेतावनी दी है कि हाजिर हों अन्यथा वारंट निकल जाएगा। राफेल का मामला, सेना का अपमान, चैकीदार चोर है ऐसे कई मामले हैं जिनमें उन्होंने देश की अवाम को ठेस पहुंचाई और माफी भी मांगी।
एक बार तो संसद में बेहद नाटकीय ढंग से कहा था कि जो लोग अपने आपको हिंदु कहते हैं , वे 24 घंटे हिंसा, नफरत और असत्य फैलाते हैं।… हिंसा…. हिंसा…. हिंसा… ऐसा कुछ बोला था। इससे क्या देशवासियों के सम्मान को धक्का नहीं लगेगा ?
सौ बात की एक बात
सौ बात की एक बात ये है कि अब आया है उंट पहाड़ के नीचे। अब राहुल गांधी बुरे फंसे हैं ऐसा लगता है। ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि शनिदेव ने राशि परिवर्तन किया है और अब बुरे लोगों की खैर नहीं है। पापियों को दण्ड मिलना तय है। देश के किसी भी क्षेत्र का कोई भी आदमी बेईमान है तो उसकी सजा उ से मिलेगी। बराबर मिलेगी।
चाणक्य की विदेशी मूल की महिला के पुत्र पर संदेह की बात के अलावा जो दुसरी बातटी कही गयी थी कि हमार ेदेश में रसूख दारों को सजा नहीं मिलती।
तो ये बात अब कदाचित् झूठी साबित होती दिखने लगी है।





