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सरगुजा छेरी बैंक’ से समूह की महिलाओं को मिलेगी आर्थिक आजादी की नई राह, किस्त के बजाय मेमने लौटाकर लखपति दीदी बनेंगी ग्रामीण महिलाएं

 

अम्बिकापुर 24 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जिला पंचायत के एनआरएलएम (बिहान) ने एक अनूठी पहल की है। जिले में ’सरगुजा छेरी बैंक’ की स्थापना की गई है, इस योजना के तहत महिलाओं को नकद राशि के बजाय सीधे बकरियां लोन पर दी जा रही हैं और उन्हें किश्त के रूप में पैसे नहीं, बल्कि बकरियों के बच्चे लौटाने होंगे।

सोहर मणी को मिली आजीविका की नई किरण
ग्राम पंचायत अमगसी की निवासी और सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती सोहर मणी इस अभिनव योजना की सफल हितग्राही हैं। अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के संकल्प के साथ उन्होंने लखनपुर ब्लॉक के कुबेरपुर में संचालित छेरी बैंक में मात्र 3,000 रुपये जमा कर चार बकरियां लोन पर ली हैं। जमा की गई 3000 रुपये से सोहर मणी को बकरी लोन पर दी जाएगी साथ ही बच्चों का 40 माह तक टीकाकरण, डिवार्मिंग, ब्रीडिंग/AI कराया जाएगा। सोहर मणी बताती हैं कि यह योजना उनके परिवार के लिए बकरी पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रारंभिक पूंजी हैं।

अनूठा बैंकिंग मॉडल मेमनों से होगा किश्तों का भुगतान
लखनपुर ब्लॉक में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई इस योजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित फार्मर प्रोड्यूस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के तहत 4 साल में हितग्राही महिला को कुल 16 बकरियों के बच्चे सरगुजा छेरी बैंक को वापस करना होगा।

50 महिलाओं के साथ हुई सफल शुरुआत
प्रोजेक्ट के पहले चरण में 50 ऐसी महिलाओं का चयन किया गया है, जो बकरी पालन में रुचि रखती थीं लेकिन उनके पास निवेश की कमी थी। बिहान के माध्यम से 76 बकरियां खरीदकर यह चक्र शुरू किया गया है। अनुमान है कि 8 साल में 4 बकरियों से लगभग 60-65 बच्चों का जन्म होगा। 16 बच्चे छेरी बैंक को लौटाने के बाद भी महिला के पास 50 से अधिक बकरियां शेष रहेंगी, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर होगा और आजिविका का माध्यम बनेगा

महिला सशक्तिकरण का ’सरगुजा मॉडल’
जिला पंचायत सरगुजा की इस पहल ने बकरी पालन को एक सुरक्षित निवेश बना दिया है। क्योंकि महिलाओं को ब्याज या नकद किस्त की चिंता नहीं रहती, इसलिए वे पूरे उत्साह के साथ बकरियों की देखभाल करेंगी। यह मॉडल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाऐगा है, बल्कि जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बकरी पालन के योगदान को भी नया विस्तार देगा।

सरगुजा छेरी बैंक परियोजना का उद्देश्य उन्हें आगे लाने के लिए जो सबसे पीछे हैं। जिले की ग्रामीण महिलाएं जिनके पास साधन नहीं उन्हें इस मॉडल से जोड़कर आजीविका बेहतर बनाने का जिला प्रशासन द्वारा कवायद की जा रही है।

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