
कोरबा 19 अगस्त 2026/कटघोरा, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत 19 अगस्त को कृषकों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, लाभों एवं व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र कटघोरा में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे कटघोरा,कोरबा एवं पाली विकासखण्ड से 50 कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कृषकों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, आच्छादन (मल्चिंग), वाफसा तथा प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन का जैविक नियंत्रण जैसे -ट्राइकोडर्मा विरडी ़नीमास्त्र, अग्निआस्त्र, ब्रम्ह्मस्त्र, दषपर्णी अर्क इत्यादि के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए कम लागत, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को प्राकृतिक खेती के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, कृषि लागत में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही कृषकों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान करते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्राकृतिक खेती अपनाने हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. एस.के. उपाध्याय, श्री डी.के. तंवर, श्री एम.एस. उर्रे, सुश्री अर्चना कुर्रे, श्री अंजय सिंह एवं सुश्री सुलोचना भुयंा सहित कृषि विज्ञान केंद्र कटघोरा के समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में कृषकों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने हेतु प्रेरित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, कटघोरा द्वारा किसानों के हित में भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई।









