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एयर इंडिया के पायलेटों पर दोष मढ़ रही अमेरिकी मीडिया, विशेषज्ञों को दावा: एविएशन कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश

नई दिल्ली । 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना में 270 लोगों की जान चली गई। इस दुर्घटना पर एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह प्राथमिक रिपोर्ट है और विस्तृत रिपोर्ट में ही सब कुछ साफ होने की संभावना है। हैरानी की बात है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले से ही अमेरिकी मीडिया इस हादसे का सारा दोष दिवंगत पायलटों पर डालने की कोशिश शुरू कर चुकी थी। इससे शक पैदा होता है कि कहीं इसके लिए कोई बड़ी साजिश तो नहीं रची गई है। शायद इसमें अरबों रुपये का खेल भी शामिल हो सकता है। यह आशंका एविएशन एक्सपर्ट की ओर से भी जताई जा रही है।
हादसाग्रस्त विमान का फ्यूल स्विच कैसे बंद हुआ?
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के फ्यूल स्विच को पायलटों ने जानबूझकर बंद किया? या फिर किसी तकनीकी खराबी के कारण इंजन बंद हो गया? AAIB ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया है। लेकिन रिपोर्ट में ‘ट्रांजिशन’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, ‘मैनुअल स्विच-ऑफ’ का नहीं। वॉयस डेटा रिकॉर्डर में जो दोनों पायलटों के बीच बातचीत का हिस्सा जारी किया गया है, उससे भी जाहिर है कि दोनों पायलटों में से किसी ने भी फ्यूल स्विच बंद नहीं किया था। फ्यूल स्विच को कटऑफ से रन पर लाया गया लेकिन इंजन पूरी तरह स्टार्ट नहीं हो पाया।
दिवंगत पायलटों के मत्थे दोष मढ़ने के पीछे कौन?
फिर भी इस बात पर काफी बहस हो रही है। सबसे संदिग्ध सवाल वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) जैसी पश्चिमी मीडिया की जल्दबाजी की वजह से पैदा हो रहा है। इस अमेरिकी मीडिया आउटलेट ने AAIB की रिपोर्ट आने से कई घंटे पहले ही पायलटों पर दोष डालने की कोशिशें शुरू कर दी थी। इसने 10 जुलाई को ही दावा किया था कि ‘जांच में पता चला है कि शायद विमान में कोई खराबी नहीं थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जांच पायलटों पर केंद्रित है। मतलब, जांचकर्ता यह देख रहे हैं कि क्या पायलटों ने कोई गलती की? अभी तक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में कोई समस्या नहीं दिख रही है।’
‘सॉफ्टवेयर में खराबी होने पर भी इंजन बंद हो सकते हैं’
जबकि, AAIB रिपोर्ट में कहा गया है कि 08:08:42 यूटीसी पर विमान की गति 180 नॉटिकल मील प्रति घंटा थी। इसके तुरंत बाद, इंजन 1 और इंजन 2 के फ्यूल कटऑफ स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ में चले गए। इससे टेकऑफ के बीच में ही इंजन बंद हो गए और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एविएशन एक्सपर्ट ने यहां ‘ट्रांजिशन’ शब्द के इस्तेमाल पर ध्यान खींचा है। मसलन, एनडीटीवी पर एक बहस में बोइंग 787 के अनुभवी पायलट कैप्टन राकेश राय ने बताया कि आजकल के विमान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कंट्रोल होते हैं। इसका मतलब है कि सॉफ्टवेयर में खराबी होने पर भी इंजन बंद हो सकते हैं, भले ही स्विच अपनी जगह पर ही रहे। उन्होंने कहा, ‘भले ही स्विच ‘रन’ पोजीशन में रहे, सॉफ्टवेयर फिर भी इंजन को बंद करने का आदेश दे सकता है।’
‘दिवंगत पायलटों को अपमानित करने की कोशिश हो रही’
AAIB की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि एक पायलट दूसरे पायलट से कह रहा है, ‘(फ्यूल स्विच)कटऑफ क्यों किया?’। इसपर दूसरे पायलट ने फौरन जवाब दिया, ‘मैंने कटऑफ नहीं किया।’ अमेरिकी मीडिया, इसी बात को तूल देकर इसे एक तरह से ‘सुसाइड एंगल’साबित करने पर तुली है। एक और एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन किशोर चिंता ने इस सुसाइड थ्योरी को बेतुका बताया है। उन्होंने कहा, ‘यह लाइन हैरानी जताती है, इरादा नहीं। यह कहना कि पायलटों ने इसकी योजना बनाई थी, न केवल उनका अपमान है, बल्कि उनके परिवारों से सच्चाई और सम्मान भी छीन लेता है।’ उन्होंने कहा, ‘वे अपना बचाव करने के लिए यहां नहीं हैं।’
पायलटों के मत्थे दोष मढ़ने के पीछे करोड़ों डॉलर का खेल?
विशेषज्ञों के अनुसार अगर पायलटों को दोषी ठहराया जाता है, तो इससे किसे फायदा होगा? एविएशन समुदाय के कई लोगों का मानना है कि इससे विमान बनाने वाली कंपनी, एविएशन रेगुलेटर्स और इंश्योरेंस कंपनियों को फायदा हो सकता है। इससे उन्हें कम पैसा देना पड़ेगा और कानूनी झंझटों से भी मुक्ति मिल जाएगी। क्योंकि, अगर मैकेनिकल खराबी पाई जाती है, तो उन पर मुकदमे हो सकते हैं और करोड़ों रुपये का जुर्माना भी लग सकता है।’

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