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भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन की सततता विषय पर कार्यशाला संपन्न

शासकीय नवीन महाविद्यालय बोरी में आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के अंतर्गत समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र के संयुक्त तत्वाधान में विगत 26 एवं 27 नवंबर 2025 को भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक जीवन की सततता विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमरनाथ शर्मा ने कार्यशाला के विषय की उपयोगिता एवं अतिथियों का परिचय दिया अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नुसरत जहां एवं डॉ. भारती साहू द्वारा किया गया। संपूर्ण कार्यशाला का संचालन डॉ. कृष्ण कुमार पटेल ने किया कार्यशाला में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के सभी  विद्यार्थी उपस्थित थे । कार्यशाला के प्रथम दिवस के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. के पद्मावती विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र शासकीय व्ही. वाय. टी. पी. जी. महाविद्यालय दुर्ग ने भारतीय ज्ञान परंपरा और अर्थव्यवस्था में वैदिक काल से वर्तमान युग तक के समायोजन की जानकारी प्रतिभागियों को दी द्वितीय सत्र में डॉ. शकील हुसैन विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान शासकीय व्ही. वाय. टी. पी. जी. महाविद्यालय दुर्ग ने कार्यशाला के विषय की महत्व को बतलाते हुए कहा कि जीवन में सफलता का अर्थ उपलब्ध संसाधनों का इस प्रकार उपयोग किया जाना है कि वर्तमान की आवश्यकता पूरी होने के साथ ही साथ भविष्य के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना है।
कार्यशाला का द्वितीय दिवस भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राकृतिक चिकित्सा को समर्पित था जिसने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी छत्तीसगढ़ शाखा से राज्य संयोजक श्री मनोज ठाकरे सह संयोजक डॉ. निर्मला गुप्ता नाड़ी वैद्य डॉ. गणेश पांडे , योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. प्रमोद नामदेव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. गणेश पांडे ने बताया की नई चिकित्सा ज्ञान भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से चली आ रही है जिसमें नाड़ी ज्ञान के आधार पर शारीरिक विकारों की जानकारी प्राप्त की जाती है तथा बताए कि हमारी रसोई घर ही औषधीयों का केंद्र है। डॉ. मनोज ठाकरे ने बताएं कि वर्तमान युग में अधिकांश बीमारियों की वजह खान-पान की अनियमिता एवं स्वास्थ्य पर भोजन का उपभोग है सही भोजन एवं उचित मात्रा में जल के सेवन से हम सभी अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं। द्वितीय सत्र में डॉ. निर्मला गुप्ता ने जल नेति नेत्र ज्योति बढ़ाने, सर्दी जुकाम का उपचार जल्द से जल्द चिकित्सा आदि के विषय में प्रतिभागियों को विस्तृत जानकारी दी तथा डॉ. प्रमोद नामदेव ने विद्यार्थियों को मृदा चिकित्सा के विषय में बतलाया एवं प्रयोग करके दिखाया संपूर्ण कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. (श्रीमती) कमर तलत के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। अपने व्यक्तित्व में उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज के परिप्रेक्ष्य में भी उतनी ही सटीक और उपयोगी है जितनी हजारों वर्ष पहले थी।

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