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पोट्ठ लईका पहल का असर रहा कारगर, जिले के 62.58 प्रतिशत लक्षित बच्चे हुए कुपोषण मुक्त

– पोषण परामर्श से आया सकारात्मक परिवर्तन
– जनसहभागिता से बच्चों के सुपोषण एवं जागरूकता के लिए व्यापक पैमाने पर किया जा रहा कार्य
राजनांदगांव 18 मार्च 2025। स्वस्थ एवं सुपोषित बच्चे देश का अमूल्य भविष्य हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप बच्चों की मजबूती, पौष्टिक आहार एवं सुपोषण के लिए पोट्ठ लईका पहल अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से जनसहभागिता से संचालित किया जा रहा है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसमें जिला प्रशासन के साथ स्वयं सेवी संस्थाएं एवं जनमानस के समन्वित प्रयासों एवं सहयोग से जागरूकता के लिए व्यापक पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का कारगर परिणाम यह रहा है कि जिले में 62.58 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के मुक्त हो गए हैं और सुपोषण की श्रेणी में आ गये हैं। पोट्ठ लईका पहल के तहत सबसे पहले सर्वाधिक कुपोषित 241 आंगनबाड़ी केन्द्रों का चयन किया गया। जिनमें 323 एसएएम (अति गंभीर कुपोषित), 1080 एमएएम (मध्यम तीव्र कुपोषण), 284 गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चे और 1726 मध्यम कम वजन वाले बच्चों को लक्षित किया गया। इस कार्यक्रम अंतर्गत लक्षित आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रत्येक शुक्रवार को पालक चौपाल का आयोजन किया जाता है। इस चौपाल में लक्षित बच्चों के माता-पिता, सरपंच, सचिव, नवविवाहित महिलाएं, गर्भवती महिलाएं, स्वसहायता समूह से जुड़ी हुई महिलाएं शामिल होते हैं। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में पोट्ठ लईका पहल के लिए मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है। पालक चौपाल में सभी समुदाय को सुपोषण के मुद्दे से जोड़ते हुए उनको पोषण परामर्श दिया जाता है और कुपोषित बच्चों के वजन की प्रत्यके सप्ताह मॉनिटरिंग किया जाता है।
कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती गुरप्रीत कौर ने बताया कि पोट्ठ लईका पहल के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों, परियोजना अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और स्वसहायता समूह की महिलाओं के कठिन प्रयासों से छह महीनों में 3413 में से 2136 बच्चों को कुपोषण से बाहर निकाला गया हंै। उल्लेखनीय है कि पोषण परामर्श और निगरानी के माध्यम से 276 एसएएम (अति गंभीर कुपोषित), 816 एमएएम (मध्यम तीव्र कुपोषण), 162 गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चे और 882 मध्यम कम वजन वाले बच्चों को कुपोषण से बाहर लाया गया है। इस प्रकार कुल 62.58 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से बाहर हुए है। अक्टूबर 2024 से राजनांदगांव और डोंगरगांव ब्लॉक के सभी एसएएम बच्चों को ऑगमेंटेड टेक होम राशन (टीएचआर) प्रदान करके एबीस समूह भी इस कार्यक्रम में शामिल हो गया है।

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