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12 साल की मोदी सरकार: फैसलों, विकास योजनाओं और राजनीतिक बदलावों का एक दशक से अधिक का सफर

धीरज कश्यप, स्वतंत्र पत्रकार

भारत की राजनीति में वर्ष 2014 एक ऐतिहासिक बदलाव का वर्ष माना जाता है। इसी वर्ष नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। इसके बाद 2019 में दोबारा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की और 2024 में तीसरी बार केंद्र की सत्ता में आई। मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को समर्थक विकास, राष्ट्रहित और बड़े नीतिगत फैसलों का दौर बताते हैं, जबकि विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार की आलोचना करता रहा है।

इस अवधि में केंद्र सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए, जिनका प्रभाव देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था पर देखने को मिला।

मोदी सरकार के प्रमुख ऐतिहासिक निर्णय

मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसलों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना प्रमुख रहा। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधान को समाप्त किया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण और समान कानून व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण भी भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक रहा। लंबे समय से चले आ रहे राम जन्मभूमि विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ और जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। भाजपा इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत और आस्था से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण मानती है।

आर्थिक क्षेत्र में वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया। इसका उद्देश्य देश में अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर एक समान कर व्यवस्था बनाना था। सरकार ने इसे “एक देश, एक कर” की दिशा में बड़ा आर्थिक सुधार बताया।

डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री जनधन योजना और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने देश में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया। करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था को बढ़ावा मिला। यूपीआई और डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने भारत को दुनिया के अग्रणी डिजिटल भुगतान देशों में शामिल किया।

रक्षा और उद्योग क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश की गई। सरकार ने रक्षा उपकरणों के घरेलू निर्माण और रक्षा निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया।

कोरोना महामारी के दौरान भारत ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक चलाया। इसके साथ ही गरीबों के लिए मुफ्त राशन योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकार ने राहत पहुंचाने का प्रयास किया।

भाजपा का राजनीतिक विस्तार और राज्यों में सरकारें

12 वर्षों के दौरान भाजपा देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक पार्टियों में शामिल हुई है। भाजपा ने कई राज्यों में अपनी सरकार बनाई और कई राज्यों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोग से सत्ता में भागीदारी की।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, असम, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गोवा और ओडिशा जैसे राज्यों में भाजपा ने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है। हालांकि राज्यों में सरकारों की संख्या चुनाव परिणामों के अनुसार बदलती रहती है।

आरएसएस की भूमिका और भाजपा का संगठन विस्तार

भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। वर्ष 1925 में स्थापित आरएसएस स्वयं को सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा संगठन बताता है। भाजपा के कई बड़े नेता आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं और दोनों संगठनों के बीच वैचारिक संबंध माना जाता है।

भाजपा के चुनावी विस्तार में संगठन की मजबूती और बूथ स्तर तक पहुंच को महत्वपूर्ण माना जाता है। चुनावों के दौरान आरएसएस से जुड़े स्वयंसेवक सामाजिक संपर्क, जनजागरण और संगठनात्मक समन्वय जैसे कार्यों में सक्रिय रहते हैं।

आरएसएस का मजबूत नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों तक सामाजिक संपर्क बनाने में सहायक माना जाता है। राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों पर आरएसएस लंबे समय से काम करता रहा है, जबकि भाजपा ने अपने राजनीतिक अभियानों में राष्ट्र सुरक्षा, विकास और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता दी है।

आपातकाल के दौर में भी आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका चर्चा में रही। इसके बाद संगठन का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा। भाजपा के विस्तार में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वैचारिक संगठनों के सहयोग को भी राजनीतिक विश्लेषक महत्वपूर्ण मानते हैं।

कांग्रेस शासन और मोदी सरकार की तुलना

स्वतंत्र भारत में लंबे समय तक कांग्रेस का शासन रहा। कांग्रेस सरकारों ने देश में बड़े संस्थानों की स्थापना, हरित क्रांति, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का विकास और आर्थिक उदारीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए।

वहीं मोदी सरकार के पिछले दशक में सड़क निर्माण, रेलवे आधुनिकीकरण, डिजिटल क्रांति, बिजली कनेक्शन, शौचालय निर्माण, बैंकिंग सुविधा और गरीब कल्याण योजनाओं में तेजी आई है।

हालांकि आलोचक रोजगार, महंगाई, किसानों की आय और सामाजिक मुद्दों पर सरकार से अधिक काम की अपेक्षा रखते हैं। किसी भी सरकार का मूल्यांकन उसकी उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों के आधार पर किया जाता है।

कांग्रेस सरकारों से जुड़े प्रमुख विवाद और घोटाले

कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकारों के दौरान कई बड़े भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, जिन पर देश में राजनीतिक बहस हुई।

2जी स्पेक्ट्रम मामले में दूरसंचार लाइसेंस आवंटन को लेकर आरोप लगे। हालांकि बाद में विशेष अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया और मामला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा।

कोयला आवंटन मामले में कोयला खदानों के आवंटन को लेकर सवाल उठे और कई मामलों में जांच हुई।

2010 राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े खर्च और व्यवस्थाओं को लेकर भी विवाद सामने आया। इसके अलावा अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में कथित रिश्वत के आरोपों ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।

कांग्रेस परिवार से जुड़े कानूनी मामले

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़े नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच की है। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि जांच एजेंसियां इसे वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला बताती हैं।

मोदी सरकार के 12 वर्ष भारतीय राजनीति में बड़े बदलावों का समय रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटाना, राम मंदिर निर्माण, जीएसटी, डिजिटल क्रांति, आत्मनिर्भर भारत, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और गरीब कल्याण योजनाएं सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रही हैं।

वहीं कांग्रेस के लंबे शासनकाल ने भी भारत के संस्थागत विकास और आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लोकतंत्र में किसी भी सरकार का मूल्यांकन जनता के अनुभव, विकास कार्यों और नीतियों के प्रभाव के आधार पर होता है।

आने वाले समय में रोजगार, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और सामाजिक मुद्दे भारतीय राजनीति के प्रमुख विषय बने रहेंगे।

 

 

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