
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के भव्य स्वागत से हुई। विद्यालय के कार्मेल बैंड दल ने अनुशासित प्रस्तुति के साथ मुख्य अतिथि को सलामी दी और सम्मान स्वरूप अतिथियों को पौधरोपण हेतु पौधे भेंट किए गए, जो कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक थे। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य और भाषण ने पूरे समारोह को उत्साह और उल्लास से भर दिया।
जैसे ही “वंदे मातरम” का सामूहिक गायन प्रारंभ हुआ, पूरा सभागार देशभक्ति की भावना से गूंज उठा। गीत की पंक्तियों ने हर हृदय में मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम और सम्मान की भावना जगा दी।
कलेक्टर श्री विलास भोसकर ने “वंदे मातरम” की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत भारत की आत्मा का स्वर है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हर भारतीय के मन में स्वाभिमान और त्याग की भावना जगाई। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि माँ भारती के प्रति प्रेम, समर्पण और आदर का यह भाव हर पीढ़ी में जीवित रहना चाहिए यही सच्ची देशभक्ति है।
कलेक्टर ने कार्मेल स्कूल की अनुशासित शिक्षण व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों की सराहना करते हुए इसे जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों में से एक बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अच्छे अंक सफलता का एक हिस्सा हैं, परंतु वास्तविक सफलता ज्ञान, जिज्ञासा और निरंतर प्रयास से मिलती है। उन्होंने महान वैज्ञानिकों थॉमस अल्वा एडिसन, आइंस्टाइन और सी. वी. रमन के उदाहरण देकर कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही जीवन का वास्तविक मंत्र है।
अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कलेक्टर श्री भोसकर ने कहा कि दृढ़ निश्चय, लगन और निरंतर परिश्रम ही व्यक्ति को मंज़िल तक पहुंचाते हैं। उन्होंने अपने भाषण के समापन पर बच्चों और शिक्षकों के साथ पूरे जोश से तीन बार वंदे मातरम् का उद्घोष किया, जिससे विद्यालय का वातावरण देशभक्ति की गूंज से भर उठा।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या सिस्टर रोशनी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल ऐतिहासिक अवसर का उत्सव है, बल्कि विद्यार्थियों में देशप्रेम, आत्मगौरव और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को और प्रबल बनाया। विद्यालय प्रबंधक सिस्टर विनिता और प्रधानाचार्या सिस्टर रोशनी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।









