
हवा-हवाई सेवा यानि इण्डिगो ने इन दिनों सरकार की नाक में दम कर दिया। अपनी मनमानी से देश के हजारों यात्रियों को खून के आंसू रूला दिये वो भी बड़ी ही धूर्तता और बेशर्मी के साथ और इसका सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ता दिख रहा है।

कंपनी ने धोखा दिया। चतुराई से उड़ान को सही समय बताकर यात्रियों को बुला लिया। वहां पहुंचकर दो घंटे लेट बताया और नियमतः नाश्ते-चाय के खर्चे से बच गयी। बाद में चार घंटे लेट बताया और ऐसा खेल खेला कि कंपनी को यात्रियों को कोई राहत या छूट नहीं मिली।
जिन्होंने सबको टाईट कर दियाउनसे पंगा ले लिया
अलहदा है कि जिन लोगों ने नक्सलियों की नाक मरोड़ दी। उनका अस्तित्व खतरे में डाल दिया कि समर्पण करने को उतावले हो रहे है, जिन्होनें खून की नदियां बहा देने जैसे खतरनाक कामों को अंजाम दिया मसलन 370 कश्मीर से हटाई और ऐसी अनेकों असंभव लगने वाले झण्डे गाड़े, वो लोग इस हवा-हवाई को हल्के में छोड़ देंगे ?
इंडिगो ने दिखाया दुस्साहस
हवाई यात्रा करवाने वाली कंपनी इण्डिगो ने लाखों लोगांे को धोखा दिया। टिकट जारी करती रही, प्लेन कंेसिल करती रही नो कम्पनसेशन, नो रिलेक्सेशन यानि फुल धूर्तता, फुल ढीठता ओनली कमाई ही कमाई।
हुआ यूं कि सरकार ने एक नियम बनाया कि पायलट ज्यादा ड्यूटी करने से थक जाते हैं। इसलिये पायलट के ड्यूटी अवर्स यानि काम के घंटे कम किये जाएं। ताकि गलती न हो, खतरा न हो। एक महीने में 50 घंटे उड़ाएंगे या 70 घंटे। अनुभवी के लिये 70 को सौ किया जा सकता है।
छोटी एयरलाईन्स ने तो नये नियमों के अनुसार व्यवस्थाएं बना लीं, पर देश की 60 प्रतिशत उड़ानों पर कब्जा करने वाली सबसे बड़ी एयरलाईन्स ने इसे हल्के में लिया- ओवर काॅन्फिडेन्स। सरकार को हल्के में लिया-निहायत नासमझी। नियमों की अवहेलना की-बड़ी रिस्क ले ली। *
हालांकि उनके पायलट 70 के बदले सौ घंटे करने को तैयार भी थे पर कंपनी ने ऐसा नहीं किया। यहां तक कि अपनी पोजिशन का नाजायज फायदा उठाते हुए कंपनी ने दबाव डालकर इस नियम में छूट ले ली।
पुतिन के आगमन के समय
भारी धूर्तता दिखाई
पर अति सर्वत्र वर्जयेत्

जब रूस के राष्ट्रपति भारत में थे तभी इण्डिगो ने ये तमाशा किया। 46 सौ उड़ानें कैंसिल कर दीं। लगा जैसे सरकार को सबक सिखा रही थी। कोई पुरानी दुश्मनी निभाने पर तुली थी।
इण्डिगो ने जानबूझकर ब्लादिमीर पुतिन के सामने भारत को भरपूर नीचा दिखाया। साफ जाहिर है कि कंपनी ने अपनी मोनोपली का नाजायज फायदा उठाया। कुल मिलाकर कंपनी ने भारी ‘अति’ की। पूरी मनमानी की।
लेकिन ये भी तय है कि शोले के गब्बरसिंग के शब्दों में ‘इसकी सजा जरूर मिलेगी। बराबर मिलेगी।
’दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बेहद नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने अन्य कंपनियों द्वारा पांच, दस हजार की टिकट को चालीस हजार मे बेचने पर भी सरकार से जवाब मांगा है।
दुनियां भर के पंगे निपटाने वालों से इस हवाई कंपनी ने पंगा ले लिया। फिर वही गब्बासिंग ‘अब तेरा क्या होगा, इण्डिगो’। ————————–
जवाहर नागदेव,
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700







