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500% टैरिफ की दहशत से हिला बाजार, मार्केट ‘ओवरसोल्ड जोन’ में पहुंचा

US टैरिफ धमकी और FPI आउटफ्लो के बीच भारतीय बाजार दबाव में हैं. निवेशक कमाई, बजट और ग्लोबल संकेतों के साफ होने का इंतजार कर रहे हैं.

शुक्रवार की शुरुआती ट्रेडिंग में भारतीय शेयर बाजार फिर से कमजोरी के साथ खुले हैं. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में दिखे हैं. लगातार बिकवाली और विदेशी निवेशकों के रिकॉर्ड आउटफ्लो की वजह से बाजार का मूड अभी भी भारी है. इस समय सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिका की उस प्रस्तावित 500% टैरिफ धमकी की है, जो उन देशों पर लग सकता है जो रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं. इसी डर ने मार्केट में गिरावट का टोन सेट किया है.

क्या हैं मार्केट के अगले ट्रिगर्स?

मौजूदा स्थिति में मार्केट तीन बड़े अपडेट का इंतजार कर रहा है, जो कमाई के नतीजे (earnings season), अमेरिका की टैरिफ पर स्थिति और आने वाला यूनियन बजट है. विश्लेषकों का मानना है कि चार दिन की गिरावट के बाद मार्केट ‘ओवरसोल्ड जोन’ में है, यानी यहां से कुछ रिकवरी की उम्मीद बन सकती है. फिर भी असली दिशा तब तय होगी जब ये तीनों संकेत साफ दिखेंगे.

विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे हैं?

जनवरी में ही FPI ने 900 मिलियन डॉलर की बिकवाली की है, जबकि 2025 में करीब 19 बिलियन डॉलर की ऐतिहासिक निकासी हुई थी. लगातार फंड निकलने से सेंसेक्स और निफ्टी पिछले चार सेशन्स में लगभग 1.7–1.8% फिसल चुके हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि US-India ट्रेड टेंशन, रूस आयल इंपोर्ट से जुड़ी शंकाएं और अमेरिका का सख्त रुख इस आउटफ्लो का बड़ा कारण है.

ग्लोबल सिग्नल कितना मायने रखेंगे?

अंतरराष्ट्रीय संकेत भी आज बाजार के मूड को प्रभावित कर सकते हैं. अमेरिका की दिसंबर जॉब रिपोर्ट और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप टैरिफ पर काफी अहम माना जा रहा है. अगर कोर्ट टैरिफ को अवैध मान लेता है और रिफंड का आदेश देता है तो इसका असर अमेरिकी सरकार की फाइनेंस पर करीब 150 बिलियन डॉलर तक हो सकता है. दूसरी ओर, अगर ट्रंप प्रशासन फिर से नए रास्ते से टैरिफ लागू करता है, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है. कुल मिलाकर, मौजूदा सत्र में भारतीय बाजार ‘कैलीकुलेटेड वेट-एंड-वॉच मोड’ में है. जहां निवेशक जोखिम उठाने से पहले साफ संकेत का इंतजार कर रहे हैं.

एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

इस हफ्ते की तेज गिरावट पर जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि तेज करेक्शन का एक बड़ा कारण अमेरिका में प्रस्तावित 500% टैरिफ की आशंका है. उनका कहना है कि अब बाजार की नजर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर होगी, जो ट्रंप टैरिफ की वैधता पर स्पष्ट रुख देगा. अगर कोर्ट इन टैरिफ को अवैध घोषित करता है तो भारतीय बाजार को राहत मिलेगी क्योंकि भारत 50% टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित रहा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस गिरावट में कई ऐसे सेक्टर भी पिटे हैं जिन पर टैरिफ का कोई सीधा असर नहीं पड़ता है. वित्तीय, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और इंडस्ट्रियल स्टॉक्स में हाल की कमजोरी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा एंट्री पॉइंट हो सकती है.

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