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देश करेगा राहुल को माफ या सूपड़ा होगा साफ, नागरिकता पर झूठ-देश से धोखा, असफल इसलिये अस्वीकार्य,भारत को कुदरत का सपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

बेहद गम्भीर धोखाधड़ी

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गयी है कि राहुल गांधी ने भारत के साथ ब्रिटिश नागरिकता भी ली हुई है।
भारतीय नियम के अनुसार भारत में दोहरी नागरिकता अपराध है।
इस मामले में सरकार ने ब्रिटिश सरकार से इस बात की इन्क्वारी की तो वहां की सरकार ने इस बात की पुष्टि की और संबंधित डाॅक्यूमेन्टस् भी सौंप दिये।

कुछ सनसनीखेज होगा
जा सकती है सांसदी
संभव है सजा भी

अब इंतजार है आगे की कार्यवाही का। 28 जनवरी को कदाचित् इसका निर्णय आ जाएगा तो संभव है कि राहुल गांघी पर बम फूट जाए और भारत की नागरिकता निरस्त हो जाए।

इससे राहुल की न केवल संासदी ही जाएगी बल्कि वे आगे कोई चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। भारत में वे कोई भी सरकारी पद नहीं ले पाएंगे और कदाचित् यहां रहने के लिये भी उन्हें एक निश्चित समयावधि का वीजा लेना पड़े, जैसे विदेशी नागरिकांे को लेना होता है।
अलावा इसके ऐसा भी हो सकता है कि धोखा देने के लिये वे नई सजा का सामना भी करें।
ईधर बार-बार हार, गैर जिम्मेदाराना बयान और जवाबदारी से मुह चुराने से विपक्षी गठबंधन यहां तक कि उनके अपने कांग्रेसी साथी भी इन सबसे उब चुके हैं।

राहुल के लिये भी अब उबरना लगभग असंभव

पिछले दिनों एक बार संसद में प्रश्न लगाकर जवाब सुनने के समय सो जाने का जो कृत्य राहुल गांधी ने किया है उसकी भरपाई कभी भी नहीं हो सकती।

हुआ यूं कि एक बार उन्होंने संसद मे एक प्रश्न किया और जब जवाब सुनने का समय आया तो उन्हें झपकी लग गयी। जवाब जारी रहा वो सोते रहे। सारी संसद उनके इस रवैये पर हंसती दिखी।

अति आत्मविश्वास, अनुभव हीनता के बावजूद अकड़ के चलते राहुल गांधी ने जो समय गंवा दिया है वो वापस नहीं आने वाला। एक-एक करके उनकी पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता उनसे दूर होते गये। सिर्फ इसलिये कि वे अपने को अजेय समझते रहे।
उन्हें लगता रहा कि कोई भी उनसे दूर हो जाए उनका प्रभाव, उनकी ताकत कभी कम नहीं होगी, कांग्रेस की कद्र कम नहीं होने वाली।

राहुल गांधी को पता नहीं था कि समय बड़ा निर्मम होता है। समय की रस्सी पर बड़ा संभलकर बैलेंस बनाकर चलना पड़ता है। अन्यथा पटकनी खानी पड़ती है।

स्वीकार्यता
सफलता की कोख से जन्म लेती है

रागा सफल नहीं हो पा रहे हैं इसलिये स्वीकार्यता भी समाप्त हो रही है। यही कारण है कि विपक्ष मे उनकी साख खत्म हो गयी है।

कई विपक्षी और वरिष्ठ कांग्रेसी राहुल की कुछ हरकतों पर सर पीट लेते हैं। मसलन संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राहुल गांधी जो प्रतिक्रिया दी थी वो निहायत हलकी थी ‘बोरिंग’। अब उनके इस डायलाॅग पर कोई रोए या हंसे।

लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष इस स्थिति में इतना गहरा विश्लेषण करता है कि बस धज्जियां उड़ाने को तत्पर रहता है।
लेकिन इसके लिये उसे सरकार का पक्ष समझना पड़ता है। उसे स्वयं को हर मुद्दे का ज्ञान, समझ और पलटवार करने की चतुराई होती है। और इसी में राहुल फेल हैं।
ऐसा नहीं कि कांग्रेस में ऐसे विद्वान नहीं हैं। बहुत हैं लेकिन अवसर नहीं मिलता। अवसर तो केवल गांधी परिवार की कुण्डली में लिखा है।

आजमाए सारे हथकण्डे
मगर कामयाबी कोसों दूर

राहुल गांधी अपने तरकस के सारे तीर चला चुके। यदि राजनीति में अभिनय किया जाता है तो सारी भूमिकाएं भी वे निभा चुके,एक्टिंग कर चुके। मगर नाकामयाब रहे। किसी भी भूमिका में उन्हे सराहना नहीं मिली, सफलता नहीं मिली।
पहले काफी समय तक उन्होंने हिंदु दिखने का भरसक प्रयास किया लेकिन देश ने उन्हंे हिंदु मानने से साफ इंकार कर दिया।

फिर वे खुलेआम हिंदुविरोधी मुहिम में भाग लेकन मुसलमानों को अपना बनाने की कोशिश में लगे रहे, यहां भी कामयाब नहीं हुए। बिहार और महाराष्ट्र के चुनावों में ये भरोसा टूट गया। इस बीच राफेल पर भी उड़ान भरी मगर सफर माफी पर जाकर रूका। हिंदु के बाद फिर अडानी-अंबानी का गीत गाया। बहुत गाया, मगर जनता को वो भी नहीं भाया।
अंत में वे जातीय जनगणना के पीछे पड़े।

इसका उन्हें लाभ मिलता इससे पहले ही सरकार ने इसकी हवा निकाल दी। सरकार ने जनगणना को हरी झण्डी दिखाकर उनके इस मुद्दे को भी समाप्त कर दिया।

और अब अगर वे कोर्ट से कन्विकटेड हो गये तो फिर उनके लिये बचा क्या ?

कहा जा सकता है कि कांग्रेस का काफी कुछ बिगड़ जाएगा, लेकिन आगे चलकर कांग्रेस फिर से सर उठा लेगी और कई ऐसे चतुर राजनेता होंगे जो उसे पुनर्जीवित कर लेंगे। छोटे स्तर पर ही सही पर वजूद रहेगा, लेकिन गांधी परिवार का नाम शायद साफ हो जाएगा।

लगता है देश का भाग्य बदल रहा है और कुदरत भी भारत और भाजपा को सपोर्ट कर रही है।

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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700

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