
छत्तीसगढ़ मे कांग्रेस सरकार के समय विपक्ष द्वारा कांग्रेसियों व उनके चापलूस अफसरों को लेकर जपी जा रही महादेव महादेव की माला ने दिमाग का दही कर दिया था कि अचानक कांग्रेसियों को देख कर भाजपाई क्यों महादेव महादेव कहते है की उधेड़बुन में था कि एक दिन गोबरहीन टुरी में बताया कि मोर लपरहा टुरा महादेव सट्टा एप्प में सट्टा लगाथे महराज ओला समझातेस । गोबरहीन की बात सुनकर दिमाग की बत्ती जली कि कांग्रेस भाजपा के बीच के महादेव भोले बाबा नही बल्कि सट्टा वाले बाबा है ।
महादेव सट्टा की आंच पूर्व मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है तत्तकालीन खद्दर और खाकी के गठजोड़ की कहानी सीबीआई के टेबल पर जांच जांच में उलझी पड़ी है । कबीरधाम में पदस्थ रहे रील मास्टर एसपी से भी सीबीआई पूछताछ कर चुकी है । महादेव सट्टा एप्प का नाम एक बार फिर पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर चर्चा में है ।
छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में इन दिनों कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि “पदोन्नति-व्यवस्था” चरमराई हुई है। फरियादी कोई आम सिपाही नहीं, बल्कि खुद कानून का रखवाला कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक, 2012 बैच के आईपीएस धर्मेंद्र सिंह छवई हैं। जब रक्षक ही न्याय की भीख मांगने मुख्यमंत्री के दरबार में गुहार लगाए तो समझ लीजिए कि सिस्टम का थाना खुद लॉकअप बन चुका है।
कहते हैं न्याय अंधा होता है, लेकिन छवई का पत्र बताता है छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में बैठा न्याय सिर्फ अंधा नहीं, बल्कि चयनात्मक दृष्टिदोष से ग्रसित दिखाई देता है। उसे कुछ अफसरों के खिलाफ एफआईआर, सीबीआई जांच, महादेव सट्टा एप जैसे काले धब्बे दिखाई ही नहीं देते, लेकिन किसी एक अफसर की “विवेचना स्तर की जांच” उसे ऐसा चुभती है जैसे आंख में लाल मिर्च।
कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई का मुख्यमंत्री को लिखा पत्र कोई भावनात्मक चिट्ठी नहीं, बल्कि सत्ता के दरबार में फेंका गया सिस्टम पर पत्थर है और पत्थर भी ऐसा कि शीशमहल में हलचल मचा दे। जब एक आईपीएस अफसर खुद न्याय मांगे, तो यह सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा नहीं होती बल्कि यह पूरे सिस्टम पर उंगली उठाती है । पत्र बताता है कि विभाग के भीतर गुटबाजी है, खींचतान है जो अंदरखाने की राजनीति की पोल खोलता चिट्ठा है जो बताता है यहां भी नियमों की व्याख्या चेहरे देखकर की जाती है । यह वह पल है जब कुर्सियों पर बैठे लोगों को सोचना चाहिए अगर आज एसपी न्याय मांग रहा है, तो कल सिपाही किस दर पर जाएगा ? आम जनता किसे लिखेगी ?
पत्र में महादेव सट्टा एप का उल्लेख बता रहा महादेव सट्टा एप्प अब कांड नहीं रहा, वह योग्यता प्रमाण पत्र बन गया है।जिस अफसर का नाम एफआईआर में, जिसकी फाइल सीबीआई की मेज पर हो वही अफसर DIG बनने की दौड़ में आगे रहे ।यह राजनीति का वही पुराना खेल है –
“दाग बड़े हों तो ऊपर तक पहुंच होती है,
और दाग छोटे हों तो कुचल दिए जाते हैं।”
महादेव सट्टा एप की काली छाया पूरे विभाग पर है, लेकिन अजीब बात है कि छाया में कुछ लोग ठंडक महसूस कर रहे हैं,और कुछ लोग झुलस रहे हैं। आरोपी विदेश में ऐश कर रहा है । महादेव एप के नए नए संस्करण लांच हो रहे है । जांच की कछुआ चाल से सरकारें बेबस नजर आती है । सत्ता की चुप्पी बताती है किया तो सब कुछ पता है,या फिर सब कुछ जानकर भी अनजान बनने की मजबूरी है।एसपी का मुख्यमंत्री को लिखा पत्र कोई व्यंग नहीं बल्कि चेतावनी है कि अगर पदोन्नति न्याय से नहीं, बल्कि राजनीतिक उपयोगिता से तय होगी,तो पुलिस वर्दी का रंग खाकी नहीं, धूसर हो जाएगा। आज सवाल एक अफसर ने उठाया है कल सवाल पूरे सिस्टम से होगा तब जनता सिर्फ यही पूछेगी –
“साहब, छत्तीसगढ़ में कानून चलता है या फिर सट्टा, सत्ता और सेटिंग?”
चलते चलते –
शिक्षा विभाग में मेडिकल अवकाश घोटालेबाजों पर होगी FIR दर्ज और वसूली या फिर मामला हो जाएगा टाँय टाँय फिस्स ?
और अंत में –
जो तौर तरीका है दुनियां का, उसी तौर तरीके से बोलो ,
बहरों का इलाक़ा है ,ज़रा ज़ोर से बोलो।
#जय_हो 28 जनवरी 2026 कवर्धा (छत्तीसगढ़)








