
जगदलपुर, 13 मार्च 2026/ जिले के बस्तर विकासखंड अंतर्गत मुंडापाल गांव की अनुसूचित जनजाति वर्ग की ग्रामीण महिला श्रीमती सिरमनी बघेल आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बन गई हैं। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे उनके परिवार की स्थिति अब बेहतर हो चुकी है। उनकी मेहनत, लगन और शासन की योजनाओं का लाभ लेने की इच्छा शक्ति ने उनके परिवार के जीवन में खुशहाली ला दी है।
सिरमनी बघेल बताती हैं कि परिवार में कुल पांच सदस्य हैं। परिवार के पास करीब तीन एकड़ पैतृक कृषि भूमि है, जो बड़े परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं थी। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें मजदूरी करने दूसरे गांव तक जाना पड़ता था। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने अतिरिक्त आय का रास्ता खोजने का निर्णय लिया। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) से जुड़कर अपने महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से कुक्कुटपालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। समूह की सहायता और बैंक लिंकेज के तहत प्राप्त राशि से उन्होंने कुक्कुटपालन का कार्य शुरू किया। पिछले पांच वर्षों से इस आयमूलक गतिविधि के जरिए उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सिरमनी बघेल ने अपनी मेहनत और प्रबंधन से आय के नए स्रोत भी विकसित किए। उन्होंने अपने पति के सक्रिय सहयोग से खेत के समीप स्थित डबरी में मछलीपालन शुरू किया और कृषि भूमि में स्थापित नलकूप के जरिए अपनी डेढ़ एकड़ रकबे पर रबी सीजन में मक्का एवं साग सब्जी की खेती करना प्रारंभ किया। इन सभी गतिविधियों से हर साल लगभग दो से तीन लाख रुपए की आमदनी होने के फलस्वरूप परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और घर में खुशहाली का माहौल बना है।
अब सिरमनी बघेल अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही हैं और दो बच्चों को जगदलपुर शहर के स्कूल में पढ़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि शासन की योजनाओं से मिले सहयोग और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत व लगन के बल पर वह अपने परिवार को खुशहाल बनाने में सफल हुई हैं। वर्तमान में वह महतारी वंदन योजना का लाभ भी ले रही हैं।









