
खड़गे ने एक सभा में अत्यंत आक्रोेशित होकर अपने भाषण में कुछ इस तरह कहा कि यदि मौका आए तो नमाज को छोड़कर भाजपा और आरएसएस को मारो। भाजपा और आरएसएस जहरीला सांप हैं।

न सिर्फ इतना बल्कि केरलम के वोटों को रिझाने के लिये वहां गुजरातियों को अनपढ़ बता दिया। निरंतर असफलता से बेहद आहत खड़गे ने जमकर भड़ास निकाली। साफ जाहिर है अपने दोनों पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
खड़गेजी ! क्यों कांग्रेस को डुबोने पर तुले हो भैया ? ये आपकी नादानी है या जानबूझकर भाजपा के धुरंधर के रूप में काम कर रहे हो ? साफ जाहिर है कि नमाज मुसलमान पढ़ते हैं और भाजपा हिंदुत्व की पैरोकार है। *इसका मतलब ये हुआ कि मुसलमान नमाज छोड़कर हिंदुओं को मारें।मोटे तौर पर इसका यही अर्थ निकाला जाएगा*।

देश में हिंदुओं के साथ होते रहे पक्षपात पर पिछले बारह सालों मे धीरे-धीरे करके ही अंकुश लगा है। ऐसे में ऐसे बयान देने से हिंदु बेहद आहत हैं और कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। साथ ही हिंदु और मुसलमान दोनों में दूरी बढ़ना तय है।
*कांग्रेस को क्या फायदा*
खड़गे कांग्रेस के कमाण्डर हैं। कमाण्डर हमेशा अपनी टीम को जिताने के लिये प्रयास करता है। वे भी कर रहे हैं।
*पर यदि वे भाजपा के धुरंधर हैं और कांग्रेस में घुसकर उसे नेस्तनाबूत करने का मंसूबा रखते हैं, तब तो उनका प्रयास सही है कि इससे भाजपा को सीधे फायदा होगा।*
ल्ेकिन अगर वे कांग्रेस के ही हितैषी हंै और वास्तव में कांग्रेस को धोखा नहीं दे रहे हैं तो ये दोनों भाषण आत्मघाती साबित हांेगे।

*सबको पता है कि जब से भाजपा ने हिंदुत्व का झण्डा उठाया है तब से हिंदु वोट धीरे-धीरे एकजुट हो रहे हैं*।
हिंदुओं को भाजपा के झण्डे तले अपना हित दिख रहा है और इस बात को भाजपा अच्छे से समझ भी रही है और जोरदार ढंग से इसी राह पर चल रही है।
दूसरी ओर ऐसे बयानांे से मुसलमान कभी एकजुट हुआ करते थे और उन्हंे इसका लाभ भी मिलता रहा था, लेकिन उनकी तादाद इतनी नहीं है कि वे चुनावों मंे जीत की गैरेन्टी हो, जबकि हिंदु वोट एकजुट हो रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि ऐसी ही हरकतों से कांग्रेस निरन्तर पिछड़ रही है। इस बात को कांग्रेस के बड़े नेता समझते भी हैं।
*एक और महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि अपनी वर्तमान स्थिति और कांग्रेस की पराजय देखकर मुसलमान राष्ट्रीय धारा से जुड़ने में ही भलाई समझ रहा है और भाजपा से उसकी दूरी कहीं-कहीं कुछ कम होती दिख रही है।*
खैर तो ये गणित समझने के कारण ही राहुल गांधी ने कई बार हिंदु वोटर्स को रिझाने के प्रयास किये। जनेउ धारण किया और स्पष्टतः दिखाने के लिये ही शर्ट के उपर पहन लिया। शिवजी से जुड़े होने का दिखावा करते रहे।
मंदिर-मंदिर जाकर ये जताने लगे कि उनसे बड़ा कोई हिंदू नहीं है, हालांकि वे किसी हिंदु मंत्र को बोलकर दिखाने के चैलेंज को स्वीकार नहीं कर पाए कभी।
*जनता सब समझती है*
अब बात करें जनता की तो जनता सब समझ रही है। शुरू से ही। जब शर्ट पर जनेउ पहना गया और मंदिरों की यात्रा की गयी, तब भी ढोंग सामने आ गया। जब खुद को शिवभक्त दिखाया गया तब भी पोल खुल गयी।
तो जैसे-जैसे दिखावटी हिंदु और हिंदुत्व की बात की गयी, वैसे-वैसे हिंदु कांग्रेस से और चिढ़ने लगा। खड़गे ने जो कहा उससे साफ तौर पर कांग्रेस को नुकसान ही होगा।
*आड़े हाथों लिया अमित शाह, रविशंकर ने*

अमित शाह ने अपनी चुनावी सभा में मजाक उड़ाते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की कि खड़गे जी क्या हो गया है आपको, राहुल के साथ रह-रहकर। राहुल के साथ का इतना असर हो गया है। जब से राहुल गांधी कांग्रेस के नेता बने हैं सभी कांग्रेसियों का स्तर नीचे हो गया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर ने खड़गे के गुजरात पर दिये गये बयान पर कहा कि कई शब्दों को तो मैं दोहरा नहीं सकता। बेशर्मी और निकृष्टता की पराकाष्ठा है।
खड़गे जी ने कहा कि गुजराती इल्लिटेªट होते हंै यानि अनपढ़ कहा। मिस्टर खड़गे बताईये क्या गांधीजी, सरदार पटेल, विक्रम साराभाई मोरारजी देसाई इल्लिटेªट थे ?
राहुल गांधी न लिखते हैं, न पढ़ते हैं, अध्यक्ष का भी वही हाल है।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700







