
परीक्षा के सफल और निष्पक्ष संचालन हेतु जिला प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे, जिसके तहत परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से ढाई घंटे पहले ही केंद्र पर बुला लिया गया था। मुख्य द्वार पर मेटल डिटेक्टर के माध्यम से सभी की सघन जांच की गई और इसके उपरांत ही उन्हें भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई। प्रवेश के दौरान शिक्षकों द्वारा इंटरनेट से प्राप्त साफ-सुथरे मूल प्रवेश पत्र और पहचान पत्र का मिलान कर गहन सत्यापन किया गया। जिन परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र में फोटो स्पष्ट नहीं थी, उन्हें दो वर्तमान रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ लाने के निर्देश दिए गए थे। इस महत्वपूर्ण परीक्षा के लिए एक विशेष ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया था, जिसका कड़ाई से पालन कराया गया। परीक्षार्थियों को केवल हल्के रंग की हाफ टी-शर्ट, हल्के कपड़े और पैरों में चप्पल पहनकर आने की अनुमति थी। केंद्र के भीतर जूता-मोजा, घड़ी, पर्स, बेल्ट, मोबाइल और किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या संचार साधनों को ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहा। यहाँ तक कि आभूषणों जैसे बाली, झुमके और कड़े या कलावा धागा पहनने पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई थी।
जिला प्रशासन द्वारा उक्त परीक्षा की संपूर्ण व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए डिप्टी कलेक्टर मनीष कुमार वर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। उनके मार्गदर्शन में शासकीय काकतीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल श्रीवास्तव और सहायक समन्वयक डॉ. अजय सिंह ठाकुर ने परीक्षा का सफल समन्वय सुनिश्चित किया।









