
*- अधिकार अभिलेख पत्र प्राप्त होने पर श्रीमती कस्तुरी बाई ने प्रसन्नता व्यक्त की*
*- श्री देवलाल यदु तथा श्री रूपचंद को मिला मालिकाना हक*
*- जन समस्या निवारण शिविर साल्हे में हितग्राहियों को मिला अधिकार अभिलेख पत्र*
राजनांदगांव 14 मई 2026 (IMNB NEWS AGENCY) वर्षों से अपने घर और जमीन पर निवास करने के बावजूद कानूनी दस्तावेजों के अभाव में असुरक्षा महसूस करने वाले ग्रामीणों के लिए स्वामित्व योजना आशा की नई किरण बनकर सामने आई है। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत छुरिया विकासखंड के ग्राम साल्हे में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में तहसील कुमरदा क्षेत्र के हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख पत्र प्रदान किए गए, जिससे उनके चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी। ग्राम उचईपुर निवासी श्रीमती कस्तुरी बाई ने अधिकार अभिलेख पत्र प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से जिस जमीन पर उनका परिवार रह रहा था, उसका कोई पक्का दस्तावेज नहीं होने से हमेशा चिंता बनी रहती थी। अब शासन की योजना से उन्हें जमीन का अधिकार अभिलेख प्राप्त हुआ है, जिससे उनके परिवार को सुरक्षा और भरोसा मिला है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत पडऩे पर वे बैंक से ऋण लेकर अपने घर और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर सकेंगी। इसके लिए उन्होंने शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसी प्रकार लालूटोला निवासी श्री देवलाल यदु तथा उचईपुर निवासी श्री रूपचंद को भी अधिकार अभिलेख पत्र प्रदान किया गया। दोनों हितग्राहियों ने कहा कि स्वामित्व योजना से उन्हें अपनी संपत्ति का कानूनी स्वामित्व मिला है, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब संपत्ति संबंधी दस्तावेज उपलब्ध होने से आर्थिक गतिविधियों के लिए बैंक ऋण लेने में भी सुविधा होगी। उल्लेखनीय है कि तहसील कुमरदा क्षेत्र अंतर्गत 58 नागरिकों को स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख पत्र वितरित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को कानूनी अधिकार प्रदान करना, संपत्ति संबंधी विवादों को कम करना तथा ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति कार्ड मिलने के बाद ग्रामीण नागरिक अपनी संपत्ति का उपयोग वित्तीय संसाधनों के रूप में कर सकते हैं। इससे उन्हें बैंकों से ऋण लेने में सुविधा होती है तथा वर्षों से बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे लोगों को मालिकाना हक के पक्के कागजात उपलब्ध हो पाते हैं। शासन की यह पहल ग्रामीण भारत को आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।









