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समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के तहत सीड-कम-फर्टी ड्रिल से अरहर की बोवाई आधुनिक कृषि तकनीक से दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल, लगभग 130 एकड़ में लगाए गए प्रदर्शन

 

अम्बिकापुर 14 जुलाई 2026/  खरीफ मौसम के दौरान दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ.एस.एस. टुटेजा के निर्देशानुसार तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जबलपुर के सहयोग से सरगुजा जिले के ग्राम सोहगा, बरकेला, खजूरी, कुबेरपुर एवं कुमडेवा में अरहर फसल का समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन लगभग 130 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए दलहन फसलों का रकबा एवं उत्पादन बढ़ाना है।

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जलवायु परिस्थितियों एवं सिंचाई जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए अरहर फसल किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रही है। वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर कम पानी में भी इस फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल के माध्यम से अरहर की कतार बोवाई कराई गई।

वैज्ञानिकों ने बताया कि सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक से बीज एवं उर्वरक का संतुलित एवं एक साथ प्रयोग संभव होता है, जिससे बीज एवं खाद की बचत होती है, श्रम लागत कम आती है तथा पौधों की समान दूरी बनाए रखने से बेहतर अंकुरण एवं विकास सुनिश्चित होता है। इसके साथ ही किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित शाकनाशी भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार का प्रभावी प्रबंधन कर फसल की उत्पादकता में वृद्धि की जा सके।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा ने किसानों को खरपतवार प्रबंधन, समय पर कृषि कार्यों के निष्पादन तथा वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप खेती करने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक श्री पी.आर. पैंकरा ने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य एवं पोषक तत्वों के समुचित उपयोग की जानकारी दी। वहीं वैज्ञानिक श्री एस.पी. गुप्ता ने अरहर फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों पर विस्तार से चर्चा करते हुए समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।

बोवाई कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की तथा कतार पद्धति से बोवाई एवं सीड-कम-फर्टी ड्रिल के उपयोग के लाभों को समझा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में रुचि व्यक्त करते हुए आगामी कृषि कार्यों में वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप खेती करने का संकल्प लिया। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आगामी दिनों में भी प्रदर्शन प्लॉटों का नियमित तकनीकी मार्गदर्शन एवं निगरानी की जाएगी, ताकि किसानों को अधिकतम उत्पादन एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।

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