17 मार्च को गुरु बालकदास शहादत दिवस पर दिप जलाएं: लेखक ,सतनामी इतिहास के शोधक कुमार [रामकुमार लहरे]
17 मार्च को गुरु बालकदास शहादत दिवस का आयोजन अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों / स्थान में करें. 17 मार्च शहादत दिवस, गुरु के स्मरण और नमन करने का दिन है.…
Read moreभारतीय समाज में मासिक धर्म अभी तक कलंकित क्यों?
भारत के पास मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति अधिक समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक विचारों का सम्मान करने का अवसर है। आपके क्या विचार हैं-क्या सरकार…
Read more5 फन, कवर्धा पंचपति, रमनसिंह का प्रश्न, रोहित शर्मा का वजन, सुंदरानी का वायदा, आवारा कुत्ते को छूट
5 फाॅस होमियोपैथी की बेहतरीन गोलियां हैं, छोटी,मीठी,सफेद। सेहत के लिये मल्टीविटामिन। बुढ़ापे को आगे सरकाने में सक्षम। 5 फाॅस तो नही हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं 5…
Read moreअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2025 : चुनौतियों से आगे बढ़ने की जिद का अवसर (आलेख : संध्या शैली)
संयुक्त राष्ट्र संघ का अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2025 का आह्वान महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी देने का है। लेकिन यह रास्ता कितना लंबा है, यह हाल की कई…
Read moreवरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर शर्मा की बात…पत्थर को शिकायत है कि, पानी की मार से टूट रहे है हम । पानी का गिला ये है कि , पत्थर हमें खुलकर बहने नही देते ।।
बात बेबाक चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार)9425522015 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये होलिका , सीता हो या पद्मावती समाज उन्हीं औरतों को पूजता है जो जल के…
Read moreदाल देख और दाल का पानी देख! (व्यंग्य-आलेख : संजय पराते)
रोटी के साथ दाल मिलना भी अब नसीब की बात है। आज की ताजा खबर है कि बाजार में दाल का संकट आने वाला है, क्योंकि सरकारी दाल…
Read moreराहुल,उद्धव का दुख, समझे न हवा का रूख उमर ने बदली चाल, कामयाब उमर-फारूख 0 वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
कांग्रेस के खिवैया राहुल गांधी का रवैया हमेशा से अकड़ू रहा है। उनके दर पर आए किसी भी याचक से वे ऐंठ जाते हैं बजाए अपनी और उसकी वास्तविक…
Read moreपच्चास साल बाद होने वाली परिसीमन को लेकर चिंताएँ
राजकोषीय संघवाद और संस्थागत ढांचे को मज़बूत करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राजनीतिक निष्पक्षता जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ मिलीजुली हो, जिससे एक सुसंगत और एकजुट भारत को…
Read moreपढ़ने की संस्कृति : केरल का अनूठा लाइब्रेरी आंदोलन (आलेख : हरलीन कौर)
बीसवीं सदी में किसानों और मज़दूरों के नेतृत्व में ज़मींदारी प्रथा के ख़िलाफ़ अनेक लड़ाइयां लड़ी गईं। ज़मींदारों ने किसानों का उत्पीड़न कई तरीक़ों से किया था, जिनमें किसानों…
Read moreविलंब के कारण न्याय से वंचित: न्यायालयों में अनसुलझे मामलों की बढ़ती हुई संख्या
भारतीय न्यायालयों में अनसुलझे मामलों का मुद्दा एक बड़ी चुनौती है, जिसने न्याय प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्याय प्रदान करने के लिए…
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