
*- रेशम उत्पादन क्षेत्र में तार फेंसिंग के लिए शीघ्र एस्टीमेट तैयार करने के दिए निर्देश*
राजनांदगांव 20 अप्रैल 2026 (IMNB NEWS AGENCY) कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आज राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम गठुला में लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित टसर परिवर्तन केन्द्र की गतिविधियों का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां चल रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली तथा रेशम उत्पादन से जुड़े कार्यों का जायजा लिया। कलेक्टर ने रेशम उत्पादन क्षेत्र (रेयरिंग व प्लांटेशन क्षेत्र) की सुरक्षा हेतु ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधिकारियों को शीघ्र तार फेंसिंग के लिए एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि फसलों एवं पौधों को नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से जुड़े ग्रामीणों की आय में वृद्धि के लिए बेहतर योजना बनाकर कार्य किया जाए और उन्हें अधिक से अधिक लाभ दिलाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से चर्चा कर रेशम उत्पादन की प्रक्रिया, इसमें होने वाले कार्यों तथा संभावित आय के बारे में जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि रेशम उत्पादन ग्रामीण आजीविका का एक अच्छा माध्यम बन सकता है, जिससे किसानों एवं समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि ग्रामीणों को आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे इस गतिविधि से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत गठला में ग्रामोद्योग संचालनालय (रेशम प्रभाग) के माध्यम से टसर परिवर्तन केन्द्र संचालित की जा रही हैं। लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस केंद्र में 2 भवन निर्मित हैं तथा बड़े क्षेत्र में अर्जुन पौधों का रोपण किया गया है, जो रेशम उत्पादन का मुख्य आधार है। केंद्र में गतिविधियों के संचालन हेतु स्व-सहायता समूहों को जोड़ा गया है, जहां महिलाओं द्वारा पौधों का रोपण, निराई-गुड़ाई, खाद डालना, पत्तियों की देखभाल, कीट पालन, प्रक्षेत्र की सफाई, कृमिपालन सहित विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। माह जून-जुलाई से जनवरी तक महिलाओं द्वारा कीट पालन का कार्य किया जाता है। विभाग द्वारा स्व-सहायता समूहों को 2 रूपए प्रति स्वस्थ डिम्ब के दर से रेशम कीट प्रदाय किए जाते है, जिससे वे उत्पादन कर आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों के मार्गदर्शन में महिलाएं वर्ष में 2 से 3 फसलें लेकर कोसा उत्पादन करती हैं। कोसा को ग्रेडिंग करके ग्रेड अनुसार ककून बैंक के माध्यम से क्रय किया जाता है। जिससे उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होता है। वर्ष 2025-26 में स्व-सहायता समूहों को कुल 5 लाख 95 हजार 320 रुपए की आय प्राप्त हुई है। इसके साथ ही केंद्र में दुर्ग संभाग का एक मात्र ककून बैंक वित्तीय वर्ष 2025-26 से संचालित है। यहां जिले के कृषि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाता है तथा उन्हें रेशम उत्पादन, टसर एवं मलबरी सेरिकल्चर की विस्तृत जानकारी दी जाती है। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर श्री अनिकेत साहू, सहायक संचालक रेशम चारूल वर्मा सहित अन्य अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
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