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गौरदंड समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, 397 आवेदनों में से कई का मौके पर ही निपटारा

*मौके पर ही कई समस्याओं का हुआ त्वरित समाधान, शेष के लिए समय-सीमा तय*

 

रायपुर, 10 जून 2026 (IMNB NEWS AGENCY) प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत नारायणपुर जिले के गौरदंड में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का भारी उत्साह देखने को मिला। आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 397 आवेदन प्राप्त हुए। शिविर में पहुंचे बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी शिकायतें, मांगें और शासकीय योजनाओं से जुड़े आवेदन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए।

 

*गाँव की ज़रूरत और विभागों की रैंकिंग*

 

शिविर में प्राप्त आवेदनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीणों की सबसे ज्यादा मांगें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी रहीं, जिसके तहत सर्वाधिक 243 आवेदन दर्ज किए गए। गौरदंड के इस समाधान शिविर में उमड़ी भीड़ ने यह साफ़ कर दिया कि ग्रामीण इलाकों में आज भी विकास की बुनियादी कड़ियाँ कितनी अहम हैं। अगर मिले हुए 397 आवेदनों का एक्स-रे किया जाए, तो जनता की ज़रूरतों की एक दिलचस्प तस्वीर उभरकर सामने आती है। शिविर में सबसे ज़्यादा व्यस्तता पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्टॉल पर देखी गई। गाँव के विकास, आवास और रोज़गार जैसी बुनियादी मांगों को लेकर अकेले इस विभाग के खाते में रिकॉर्ड 243 आवेदन आए। इसके बाद ग्रामीणों की दूसरी बड़ी चिंता साफ़ पानी को लेकर दिखी, जहाँ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी को 42 आवेदन सौंपे गए। वहीं, ज़मीन-जायदाद के मामलों को सुलझाने के लिए राजस्व विभाग के पास 30 और खेती-किसानी को उन्नत बनाने की आस में कृषि विभाग के पास 28 आवेदन पहुँचे। गाँव को रोशन रखने के लिए विद्युत विभाग को 13 और मवेशियों की देखभाल के लिए पशु चिकित्सा विभाग को 10 आवेदन मिले। इसके अलावा शिक्षा, आरटीओ, वन, महिला एवं बाल विकास जैसे तमाम अन्य विभागों को मिलाकर कुल 31 आवेदन दर्ज किए गए। सुशासन की इस चौपाल में कुल 397 उम्मीदों की अर्जियाँ प्रशासन के हाथों में सौंपी गईं, जिन्हें जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने का वादा किया गया है।

 

*मौके पर ही हुआ त्वरित निराकरण*

 

शिविर में मौजूद विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों ने प्राप्त आवेदनों का बारीकी से परीक्षण किया। कई संवेदनशील और तत्काल सुलझने योग्य मामलों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को राहत दी गई। वहीं, शेष बचे आवेदनों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपते हुए एक निश्चित समय-सीमा (टाइम-लिमिट) के भीतर निराकरण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

 

शिविर में आए ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार की इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। उनका कहना था कि श्सुशासन तिहारश् के माध्यम से अब उन्हें अपनी समस्याओं को लेकर दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं, बल्कि प्रशासन खुद उनके द्वार तक पहुंच रहा है।

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