
मध्यप्रदेश
दतिया से लगभग 96 किलोमीटर दूर एक गांव है नाम है ददरौआ। ये मेहगांव जिला भिण्ड में स्थित है। यहां पर महन्त श्री दंदरौआ धाम श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर संत रामदास जी महाराज द्वारा मंदिर, भण्डारा, पुस्तकालय और स्कूल का संचालन किया जाता है।

इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां पर हनुमानजी डाॅक्टर के रूप् में विराजित हैं।
मान्यता है कि यहां जो कोई भी अपनी पुरानी बीमारी लेकर आता है, प्रार्थना करता है और गुरूजी द्वारा फूंका गया जल ग्रहण करता है वो शीध्र ही बीमारी से छुटकारा पा लेता है।
इसलिये यह स्थान डाॅ बजरंग बली मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है।
यहां पर मंगलवार को सबसे अधिक भीड़ रहती है और शनिवार को भी चहल-पहल अधिक रहती है। मंदिर सातों दिन खुला रहता है।
जुगाड़ से चलाई सरकार
एक अंग्रेज भारत आया घूमने। घूमते-घूमते उसने जिनके घर मीटर नहीं थे उन्हें मेन लाईन से हुक लगाकर बिजली चोरी से घर में हीटर और फ्रीज़ चलाते देखा तो पूछा ये कैसे संभव है। जवाब मिला ‘जुगाड़ से’।
फिर यात्रा के दौरान उसने वेटिंग लिस्ट वालों को भटकते और बिना टिकट और बिना रिजर्वेशन वालों को आराम से गाड़ी मे बैठकर जाते देखा। पता किया कि ये भी जुगाड़ से संभव है। बड़े ब्रिज का ठेका अधिकतम् रेट कोटेशन वाले को भी जुगाड़ से मिला।
वो जान गया कि यहां पर जुगाड़ फार्मूला है जिससे कठिन से कठिन काम संभव हो जाता है।
उस विदेशी ने अपनी सरकार को ये बात बताई तो वो काफी प्रभावित हुई।
अपनी समस्याओं के समाधान के लिये उस सरकार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंग से जुगाड़ का फार्मूला मांग लिया तो जवाब मिला कि हमारी सरकार खुद ही जुगाड़ से चल रही है हम आपको उसका फार्मूला नहीं दे सकते।
मजाक की ये बात हमारे देश में बहुत बार सही साबित होती दिखती है।
एकाएक अनअपेक्षित रूप् से प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंग ने पूरे दस साल तक कांग्रेस की सरकार को चलाया।
उनका जुगाड़ ऐसा था कि करना धरना कुछ नहीं, बस आराम ही आराम, कहीं कोई तनाव नहीं, कोई जवाबदारी नहीं और रूतबा प्रधानमंत्री का। है न बढ़िया जुगाड।
जुगाड़ से सुरक्षित रहेंगे अफसर
यदि सीबीआई को किसी सरकारी आदमी के खिलाफ कोई मामला कोर्ट में चलाना हो मध्यप्रदेश की सरकार से अनुमति लेनी ।
एफआईआर तो दर्ज कर ले लेकिन आगे की कानूनी कार्यवाही के लिये सरकार से अनुमति लेनी होगी।
जाहिर है जिसका जुगाड़ होगा उसकी बल्ले-बल्ले होगी यानि वो चहुंओर पूर्ण सुरक्षित। न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी। न सरकार अनुमति देगी न कार्यवाही होगी।
डाॅ मोहन यादव मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं उन्होंने ये जुगाड़ भ्रष्ट अफसरांे के सरों को बचाने के लिये जुटाया है ये तो बड़े आश्चर्य की बात है।
क्योंकि उनके बाॅस मोदीजी भ्रष्ट अफसरों को लटकाने की मंशा रखते हैें।
ऐसे में मोहन यादव के इस कदम से उनकी मंशा क्या हो सकती है ?
जुगाड़ की जाली
महाराष्ट्र में धनगरों को एसटी आरक्षण न देने की मांग को लेकर विधानसभा के डिप्टी स्पीकर, सांसद और विधायक कुल छह नेताओं ने छमंजिला भवन की तीसरी मंजिल से कूदी लगा ली।
बाप रे… फिर… ? मरे की बचे….
वा मरते कैसे ?
कूदने से पहले नीचे जाली लगा ली थी, सुरक्षा के लिये… । जब सुरक्षा जाली लगी है तो कोई मरेगा कैसे.. इसे कहते हैं जुगाड़।
एक फिल्म में एक बड़ा गुण्डा एक मर्डर कर देता है और अपने अड्डे पर आकर दुखी होकर पाश्चाताप करता है।
भगवान के आगे आकर कहता है कि हे भगवान मैने पाप किया है। मझे सजा मिलनी चाहिये
ऐसा कहकर वो अपनी बंदूक अपनी कनपट्टी पर रखकर ट्रिगर दबा देता है।
उसके साथी जूनियर गुण्डे घबरा जाते हैं। पर ये क्या उसे कुछ नहीं होता क्योंकि उसकी बंदूक में गोली तो थी ही नहीं। बिना गोली की बंदूक का जुगाड़ था।
जैसे महाराष्ट्र के नेताओं ने नीचे जाली लगाने का जुगाड़ कर लिया था।
वैसे ही गुण्डे ने पहले ही गोली निकाल लेने का जुगाड़ कर लिया था।
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जवाहर नागदेव वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, विश्लेषक,
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’







