
अम्बिकापुर 02 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरगुजा जिले में उद्यानिकी विभाग की सूक्ष्म सिंचाई योजना किसानों की आय बढ़ा रहा है। इस योजना के माध्यम से किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
इसी योजना का लाभ लेकर जिले के विकासखंड लुण्ड्रा के ग्राम पंचायत झेराडीह निवासी प्रगतिशील किसान श्री आनन्द राम पैकरा, पिता श्री सीताराम ने अपनी खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए सफलता हासिल की है। उनके पास कुल 0.909 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें 0.509 हेक्टेयर में धान तथा 0.400 हेक्टेयर में टमाटर एवं गोभी जैसी सब्जियों की खेती की जा रही है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत लगभग डेढ़ एकड़ क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की, जिसके लिए उन्हें शासन से 55 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ।
श्री आनन्द राम पैकरा बताते हैं कि पहले पारंपरिक सिंचाई पद्धति में अधिक पानी, समय और श्रम की आवश्यकता पड़ती थी। खेत में समान रूप से पानी पहुंचाने में कठिनाई होती थी, जिससे फसल की वृद्धि भी प्रभावित होती थी। लेकिन ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने के बाद पानी सीधे पौधों की जड़ों तक आवश्यक मात्रा में पहुंच रहा है। इससे पानी की बचत होने के साथ-साथ पौधों का विकास बेहतर हुआ है और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आया है।
उन्होंने बताया कि ड्रिप प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों का उपयोग भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार पौधों को पोषक तत्व मिलने से टमाटर एवं गोभी की फसल स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण तैयार हो रही है। इससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ खेती की लागत में भी कमी आई है। कम पानी, कम श्रम और बेहतर उत्पादन के कारण सब्जी खेती पहले की अपेक्षा अधिक लाभकारी बन गई है।
जिले में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर जिले के किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बन रहे है।








