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वनों की सुरक्षा को मिला नया कवच- 227 मुनारों का निर्माण पूर्ण

 

रायपुर, 24 मार्च 2026/ वन विभाग में मुनारा निर्माण केवल जमीन की सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनों की सुरक्षा, प्रबंधन और कानूनी स्थिति को मजबूत करने का एक बहुआयामी उपकरण है। मुनारा निर्माण बहुआयामी पहलू हैं। वनों की सुरक्षा और अवैध अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कैम्पा मद के अंतर्गत विभिन्न वन परिक्षेत्रों में कुल 227 नए मुनारों (बाउंड्री पिलर) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। यह कार्य वन सीमाओं के स्पष्ट निर्धारण, संरक्षण और विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

*मुनारा निर्माण की प्रमुख विशेषताएं*

परियोजना के तहत कवर्धा मंडल के अधिकांश संवेदनशील और महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में मुनारों का निर्माण किया गया है। इन मुनारों को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से तैयार किया गया है, ताकि वे लंबे समय तक टिकाऊ बने रहें। हाल ही में निरीक्षण के दौरान प्रबंध संचालक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने इस कार्य की सराहना की। स्पष्ट सीमांकन होने से अब वन रक्षकों और गश्ती दल को निगरानी कार्य में सुविधा होगी और वन क्षेत्र की सुरक्षा अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

*वन भूमि पर अवैध कब्जों और वन संपदा की चोरी पर लगेगी रोक*

उल्लेखनीय है कि वन सीमाएं स्पष्ट न होने के कारण पहले ग्रामीणों और वन विभाग के बीच विवाद की स्थिति बनती थी। अब मुनारों के निर्माण से वन भूमि की सही पहचान संभव हो सकेगी। इससे अवैध कब्जों और वन संपदा की चोरी पर रोक लगेगी। अक्सर सीमांकन स्पष्ट नहीं होने के कारण अज्ञानता में अतिक्रमण की घटनाएं सामने आती थीं और कार्रवाई में कठिनाई होती थी। अब स्पष्ट सीमाओं के कारण ऐसे मामलों में तेजी और पारदर्शिता आएगी। इसके अलावा, विवाद की स्थिति में ये मुनारे कानूनी साक्ष्य के रूप में भी उपयोगी साबित होंगे, जिससे बेदखली की कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।

*वन संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा*

कवर्धा परियोजना मंडल का यह प्रयास दर्शाता है कि राज्य सरकार वन संरक्षण और प्रबंधन को लेकर गंभीर है। मुनारा निर्माण केवल सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और जैव विविधता संरक्षण में भी सहायक होगा। इस पहल से वन संपदा की सुरक्षा मजबूत होगी और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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