
ट्राइसाइकिल मिलने से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम, अब आसान होगा दैनिक जीवन
धमतरी, 8 मई 2026। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से प्रदेशभर में आयोजित सुशासन तिहार कई जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इसी क्रम में कुरूद विकासखंड के ग्राम सिवनीकला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर दिव्यांग जीवन लाल साहू के लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास का माध्यम बन गया।
ग्राम सिवनीकला निवासी जीवन लाल साहू बचपन से ही दोनों पैरों की गंभीर दिव्यांगता से पीड़ित हैं। चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उन्हें वर्षों से घुटनों के बल चलकर अपने दैनिक कार्य करने पड़ते थे। छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपने परिवार के साथ जीवनयापन में निरंतर सहयोग करते रहे।
जीवन लाल के परिवार के पास लगभग दो एकड़ कृषि भूमि है, जिसकी देखरेख में वे अपनी क्षमता अनुसार योगदान देते हैं। शासन की ओर से उन्हें प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन के रूप में 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त होती है। साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से 35 किलो चावल भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे परिवार को आर्थिक संबल मिल रहा है।
ग्रामीणों से उन्हें जानकारी मिली कि सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित शिविर में आवेदन करने पर दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बाद उन्होंने समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में आवेदन प्रस्तुत किया। विभाग द्वारा संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए शिविर स्थल पर ही उन्हें ट्राइसाइकिल प्रदान की गई।
ट्राइसाइकिल प्राप्त करते ही जीवन लाल के चेहरे पर खुशी और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक होकर उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। खेत तक पहुंचना हो, गांव में किसी कार्य से जाना हो या दैनिक जरूरतें पूरी करनी हों, अब उनका जीवन पहले की तुलना में अधिक सहज और सम्मानजनक हो सकेगा।
जीवन लाल साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की संवेदनशील पहल ने उनके जीवन में नई आशा और आत्मनिर्भरता का संचार किया है। सुशासन तिहार के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का त्वरित लाभ पहुंचना शासन की जनहितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आ रहा है।








