Ro no D15139/23

आईआईटी भिलाई का नवाचार: औद्योगिक सल्फर वेस्ट से स्वच्छ जल का निर्माण

*रायपुर, 02 दिसंबर 2025/* सतत रसायन विज्ञान को भारत की स्वच्छ पेयजल की राष्ट्रीय आवश्यकता से जोड़ते हुए आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पॉलिमर तकनीक विकसित की है, जो औद्योगिक सल्फर कचरे का उपयोग जल प्रदूषण से निपटने में करती है। शोध टीम भनेन्द्र साहू, सुदीप्त पाल, प्रियंक सिन्हा और डॉ. संजीब बनर्जी ने एक धातु-रहित, पर्यावरण-अनुकूल पॉलिमराइजेशन प्रक्रिया विकसित की है, जो कम मूल्य वाले सल्फर वेस्ट को सल्फर-डॉट्स (एस-डॉट्स) में परिवर्तित करती है।

ये एस-डॉट्स उन्नत स्मार्ट पॉलिमरों के निर्माण में हरित फोटोकैटलिस्ट के रूप में कार्य करते हैं। यह कार्य अनुप्रयुक्त रसायन अंतर्राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित हुआ है। यह नवाचार दो प्रमुख सामाजिक चुनौतियों का समाधान प्रदान करता है। औद्योगिक सल्फर वेस्ट का प्रबंधन और प्रदूषित जल से हानिकारक हाइड्रोफोबिक प्रदूषकों को हटाना। पेट्रोलियम रिफाइनिंग, कोयला प्रसंस्करण और रासायनिक उद्योगों से निकलने वाला सल्फर वेस्ट अकसर निपटान और पर्यावरण संबंधी समस्याएँ पैदा करता है।
इस वेस्ट को उच्च-मूल्य वाले एस-डॉट्स में बदलकर आईआईटी भिलाई की टीम ऐसे मल्टी-आर्म स्टार पॉलिमर्स का निर्माण करने में सक्षम हुई है, जिनमें जल शुद्धिकरण की उत्कृष्ट क्षमता है। ये स्टार पॉलिमर स्वतः नैनोस्केल गोलाकार संरचनाएँ बनाते हैं, जो सूक्ष्म स्पंज की तरह कार्य करते हुए हाइड्रोफोबिक प्रदूषकों को फँसा लेते हैं। परीक्षणों में इन्होंने डाई, कीटनाशक और तेल अवशेष जैसे हानिकारक प्रदूषकों का 80 प्रतिशत से अधिक सफलतापूर्वक निष्कासन किया, जो नदियों और झीलों की सफाई के लिए इसकी मजबूत संभावनाएँ दर्शाता है। भारत में जल प्रदूषण विशेष रूप से औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में यह तकनीक अपशिष्ट जल शोधन और पर्यावरण पुनर्स्थापन प्रयासों को सशक्त बना सकती है।
इस दोहरे लाभ पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बनर्जी ने कहा कि हम औद्योगिक कचरे को पहले स्वच्छ उत्प्रेरक में बदलते हैं और फिर उसी से ऐसे स्मार्ट पॉलिमर बनाते हैं जो प्रदूषित जल को शुद्ध करते हैं यह एक पूर्ण सर्कुलर समाधान है। यह तकनीक जल जीवन मिशन, पर्यावरण पुनर्स्थापन कार्यक्रमों और सतत औद्योगिक प्रथाओं जैसे राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप है। हल्की यूव्हीए रोशनी में कार्य करने वाली यह धातु-रहित, वेस्ट-आधारित पॉलिमर तकनीक भारत के सुरक्षित, स्वच्छ और सभी के लिए सुलभ जल के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक शक्तिशाली साधन सिद्ध हो सकती है।

*Link to the Article:* *https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/anie.202512380*

  • Related Posts

    एक दूसरे राज्य के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने का है यह महत्वपूर्ण अवसर – राज्यपाल डेका

    *140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान – मुख्यमंत्री साय* *लोकभवन में मनाया गया विभिन्न राज्यों का स्थापना दिवस* रायपुर, 01 अप्रैल 2026 / राज्यपाल…

    Read more

    नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल रायपुर 1 अप्रैल 2026 (IMNB NEWS AGENCY)…

    Read more

    NATIONAL

    बंगाल में युवा और महिला पर भाजपा का फोकस, संकल्प पत्र में इन योजनाओं की घोषणा संभव

    बंगाल में युवा और महिला पर भाजपा का फोकस, संकल्प पत्र में इन योजनाओं की घोषणा संभव

    क्रीमिया में क्रैश हुआ रूस का मिलिट्री विमान, चट्टाने से टकराया; 29 की मौत

    क्रीमिया में क्रैश हुआ रूस का मिलिट्री विमान, चट्टाने से टकराया; 29 की मौत

    असम चुनाव 2026: BJP ने जारी किया संकल्प पत्र, 2 लाख नौकरियां और UCC लागू करने का वादा

    असम चुनाव 2026: BJP ने जारी किया संकल्प पत्र, 2 लाख नौकरियां और UCC लागू करने का वादा

    ईरान पर फाइनल अटैक? ट्रंप से खाड़ी देशों ने जंग जारी रखने की लगाई गुहार

    ईरान पर फाइनल अटैक? ट्रंप से खाड़ी देशों ने जंग जारी रखने की लगाई गुहार

    ट्रंप का दावा: ‘ईरान के साथ जल्द होगी बड़ी डील’, पाकिस्तान के जरिए चल रही है बातचीत

    ट्रंप का दावा: ‘ईरान के साथ जल्द होगी बड़ी डील’, पाकिस्तान के जरिए चल रही है बातचीत

    अधिकारी बड़े चालू-गये मंत्री तो पनीर की जगह आलू; विपक्ष की हालत खस्ता-पैट्रोल सस्ता; एपीकेफाईल से बचें,पादरी की चतुराई-कोर्ट में काम न आई,वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

    अधिकारी बड़े चालू-गये मंत्री तो पनीर की जगह आलू; विपक्ष की हालत खस्ता-पैट्रोल सस्ता; एपीकेफाईल से बचें,पादरी की चतुराई-कोर्ट में काम न आई,वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…