
उच्चतम न्यायालय की मीडिएशन एंड कांसिलेशन प्रोजेक्ट कमेटी द्वारा चलाए जा रहे “मीडिएशन फॉर द नेशन 2.0” कार्यक्रम के तहत आज जिला न्यायालय दुर्ग के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य था मीडिएशन (मध्यस्थता) की प्रक्रिया को आसान, मजबूत और लोगों के लिए अधिक उपयोगी बनाना, ताकि विवादों का जल्दी और सरल तरीके से समाधान हो सके। बैठक में मीडिएशन 2.0 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई और आवश्यक निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख रूप से मीडिएशन प्रक्रिया को पारदर्शी, समय पर और लोगों के लिए ज्यादा सुविधाजनक बनाने की योजना बनाई गई। पारिवारिक, सिविल, आपराधिक और अन्य मामलों में न्यायालयीन कार्यवाही से पहले मीडिएशन के माध्यम से समाधान खोजने पर जोर दिया गया। मध्यस्थों और परामर्शदाताओं को नई तकनीकों और तरीकों का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया। लीगल एड डिफेंस काउंसिल, मध्यस्थ अधिवक्ताओं, परामर्शदाताओं और न्यायिक अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर सहमति बनी। मामलों को मध्यस्थता हेतु भेजने और उनके फॉलो-अप की प्रक्रिया को बेहतर और एक समान बनाने पर चर्चा हुई। मीडिएशन कक्षों और परामर्श सेवाओं को और सुविधाजनक बनाने का प्रस्ताव रखा गया। आम जनता में मीडिएशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे एक आसान व भरोसेमंद तरीका बताने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि मीडिएशन 2.0 न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय, संवेदनशील और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और सभी अधिकारियों तथा अधिवक्ताओं को इसमें पूरा सहयोग देना चाहिए। जिला न्यायालय दुर्ग न्यायिक सेवाओं को लोगों के लिए और भी सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
इस बैठक में परिवार न्यायालय के न्यायिक अधिकारीगण, जिला न्यायालय के मध्यस्थ न्यायिक अधिकारीगण, स्थायी एवं जनोपयोगी लोक अदालत के अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के अधिवक्तागण, मध्यस्थ अधिवक्तागण तथा परिवार न्यायालय के परामर्शदातागण शामिल हुए।







