
अम्बिकापुर 24 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ की धरा पर 25 मार्च से खेल और संस्कृति का अनूठा संगम होने जा रहा है। प्रदेश पहली बार देश के पहले ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ की मेजबानी कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में आयोजित इस खेल महाकुंभ का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सरगुजा का अम्बिकापुर होगा, जहाँ देश भर के जनजातीय खिलाड़ी अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
सरगुजा में कुश्ती और मलखंभ का रोमांच
सरगुजा संभाग के खेल प्रेमियों के लिए यह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं है। स्थानीय गांधी स्टेडियम में तैयारियां की जा रही हैं। सरगुजा के हिस्से में दो प्रमुख आकर्षण आए हैं, जिससे कुश्ती (Wrestling): 28 से 31 मार्च तक पुरुष एवं महिला वर्ग के रोमांचक मुकाबले होंगे। साथ ही मलखंभ (Demo Sport): 31 मार्च से 1 अप्रैल तक पारंपरिक खेल मलखंभ का प्रदर्शन होगा, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
तैयारियों का जायजा और खिलाड़ियों का स्वागत
इस आयोजन के लिए अम्बिकापुर में खिलाड़ियों के ठहरने, भोजन और परिवहन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। खेल मंत्री अरूण साव के नेतृत्व में विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि बाहर से आने वाले लगभग 2500 खिलाड़ियों और अधिकारियों को छत्तीसगढ़ की ’अतिथि देवो भव’ की परंपरा का अनुभव हो।
आयोजन की मुख्य विशेषताएं
भव्य शुभारंभः खेल महाकुंभ का औपचारिक आगाज़ 25 मार्च को राजधानी रायपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में गरिमामय समारोह के साथ होगा। देशभर की भागीदारीः इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के 30 राज्यों से लगभग 2500 जनजातीय खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे। तीन प्रमुख केंद्रः खिलाड़ियों की सुविधा और व्यापक प्रसार के लिए मुकाबलों का आयोजन प्रदेश के तीन प्रमुख शहरोंकृ रायपुर, जगदलपुर (बस्तर) और अम्बिकापुर (सरगुजा) में किया जाएगा। विविध खेल विधाएंः प्रतियोगिता के दौरान एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, तीरंदाजी, तैराकी और कुश्ती जैसे 7 मुख्य खेलों में कड़े मुकाबले होंगे, जबकि कबड्डी और मलखंभ विशेष प्रदर्शन (डेमो गेम्स) के रूप में आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा वैश्विक मंच
इस ऐतिहासिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य सरगुजा सहित प्रदेश के सुदूर वनांचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को तराशना है। सरगुजा में होने वाले कुश्ती के मुकाबले स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के मानकों से परिचित कराएंगे, जिससे भविष्य में जनजातीय क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता तैयार हो सकें।









