
राहुल गांधी बेहद असफल हैं। असफलता के एक्ज़ाम में उन्हें 95 प्रतिशत प्राप्त हो चुके हैं। थोड़े समय के बाद ही जब आगामी पांच चुनाव वो हार जाएंगे जैसे कि हालात नजर आ रहे हैं, तो हण्ड्रेड परसेन्ट आंकड़ा हो जाएगा।

वे काफी मजाकिया किस्म के नेता हैं। कभी भी चुनाव को हार-जीत को गंभीरता से नहीं लेते। वे हर बात को सहज रूप् से मजाक में ले लेते हैं। और इसी हाईकमान की परंपरा को आत्मसात करते हुए उनके समर्थक भी मजाक करने लगे हैं।
क्या मज़ाक है:
छत्तीसगढ़ में अयोग्य जिला अध्यक्षों को हटाया जाएगा
एक एकदम फ्रैश मजाक ये कि राहुल गांधी के आॅफिस से एक फरमान जारी हुआ है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 41 जिलों के अध्यक्षों को उनके द्वारा तय पैमाने पर खरा उतरना होगा। वैसे इसमें कोई खास बात नहीं है। यहां तो चमचागिरी करो और पद पाओ की परंपरा रही है। हालांकि कुछ अपवाद भी होते हैं।

दुविधा इसमें है कि तमाम बड़े नेताओं को एकजुट कर गुटबाजी पर अंकुश लगाना होगा अनिवार्य शर्त होगी। यदि इसमें सफल नहीं हुए तो बदल दिये जाएंगे। भला ये भी कोई बात हुई ? है कोई माई का लाल जो राजनैतिक दलों में गुटों को एक सूत्र में गूंथ सके ?
दूसरी बात ये कि कांग्रेस के हर ज़िले के अध्यक्ष ने आंदोलन कौन-कौन से किये और इसका असर जनता पर कितना हुआ, ये तय किया जाएगा। अब इसमें पहला पार्ट तो ठीक है। चंदा लेना है और आंदोलन करने हैं। कोई दिक्कत नहीं है।
कहते हैं सत्ताधारी आम भाजपाई चंदा उगाहने में उतने एक्सपर्ट नहीं होते जितने बेरोजगार कांग्रेसी होते हैं।

इसलिये आंदोलन, धरने, पेपरबाजी तो की जा सकती है पर इससे जनता पर असर का आंकलन करना तो गले में फंदे जैसा है। अब भला कांग्रेस से उखड़ी जनता को राहुल गांधी खुद भी नहीं साध पा रहे हैं तो इन जिला अध्यक्षों की क्या मजाल ?
और अगर खराब परफाॅर्मेन्स पर हटाने का नियम लागू कर दिया गया तो सबसे उपर सबसे पहला नाम तो राहुल गांधी का ही आ जाएगा। तो क्या उनका दूध-भात घोषित किया जाएगा ?
वास्तविकता तो ये है कि अध्यक्षों के चयन में अभी तक पूर्व मुम भूपेश बघेल का बोलबाला रहा। जबकि दीपक बैज, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव को थोड़े में सब्र करना पड़ा। ऐसे मे ये अध्यक्ष अपने आकाओं को पटाने का प्रयास करेंगे कि परफाॅरर्मेन्स पर ध्यान देंगे ?

तुसी बड़े
मजाकिया हो
राहुल गांधी माता सहित जेल जाने के रास्ते पर हैं। ये मजाक नहीं गंभीर बात है। असल में नेशनल हेराल्ड मामले में दस्तावेजों के आधार पर इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गयी है वो भी 11 साल की तहकीकात के बाद।
जिसकी पहल भी की थी खतरनाक विद्वान डाॅ सुब्रमण्यम स्वामी ने। वास्तव में हालात बड़े खतरनाक हैं और कोई भी समझदार इंसान होगा तो इन परिस्थितियों में घबराएगा, हंसी-मजाक नहीं करेगा।
जबकि हमारे कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज इस पर मजाक कर रहे हैं। कहते हैं कि ये भाजपा सरकार की खीझ है। मोदी सरकार गांधी परिवार से डर गयी है। बैज एक अच्छे

नेता हैं उन्हें ऐसा मजाक शोभा नहीं देता।
क्या सचमुच मोदी सरकार गांधी परिवार से डर रही है, भाजपा गांधी से खीझ रही है। खीझता वो है जो हारता है या सत्ता जाने के भय से विचलित होता है। हार से खिसियाई हुई बिल्ली खम्भा नोचती है। जीतने वाला नहीं खीझता।
अब्बड़ हंसावत हस जी
कांग्रेसियों की ये हंसने-हंसाने की आदत बड़ी अच्छी है। दिलदार लोग है। एक टीवी डिबेट में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत्र ने लालू यादव के संदर्भ में की गयी किसी टिप्पणी पर कहा कि लालू यादव के बारे मे ऐसा मत कहिये, वे सज्जन आदमी हैं।
बताईये ? इतना बड़ा मजाक। भ्रष्टाचार के अपराध में जेल काटा व्यक्ति सज्जन ?

हालांकि उसी समय सुधांशू त्रिवेदी ने पलटकर कहा कि यदि सज्जन हैं तो आपने उन्हें जेल क्यों भेजा था। ————————–
जवाहर नागदेव,
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700






