
इन तालाबों का निर्माण स्थानीय स्तर पर न केवल जल संकट को दूर करेगा, बल्कि ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। प्रशासन का उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और महिला स्व-सहायता समूहों को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर मत्स्यपालन एवं सिंचाई जैसी गतिविधियों से आजीविका के नए अवसर सृजित करना है। इस अभियान के तहत तोकापाल जनपद के भेजरीपदर (पाण्डुपारा) में 19 लाख 56 हजार रुपये और बास्तानार के कोड़ेनार में 19 लाख रुपये की लागत से तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई है. इसी क्रम में लोहण्डीगुड़ा के तारागांव और तोयर, दरभा के बड़ेकड़मा, बस्तर के मधोता व सोरगांव, बकावण्ड के वनकोमार तथा जगदलपुर के कुम्हली (जीरागांव) जैसे क्षेत्रों में भी लाखों की लागत से कार्य स्वीकृत किए गए हैं।







