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नीति आयोग राष्ट्रीय कार्यशाला: उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

रायपुर, 29 अगस्त 2025/ राजधानी रायपुर में आयोजित नीति आयोग की राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला के दूसरे और तीसरे तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने के लिए मेंटरशिप मॉडल को समय की आवश्यकता बताया।

द्वितीय तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा को सुलभ और समावेशी बनाने में मेंटरशिप की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। दोपहर बाद आयोजित दूसरे सत्र की अध्यक्षता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. संजय कुमार और सह-अध्यक्षता आईआईएम लखनऊ की प्रोफेसर पुष्पेंद्र प्रियदर्शी ने की। इस सत्र में उच्च शिक्षा में मेंटरशिप ढाँचे के परिदृश्य का अन्वेषण, सर्वाेत्तम प्रथाओं की पहचान और कमजोर समूहों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में एक सुदृढ़ मेंटरशिप ढाँचा तैयार करने हेतु सुझाव प्रस्तुत किया गया।

द्वितीय सत्र में नियामक परिप्रेक्ष्य में मेंटरशिप का विकास और संवर्धन विषय पर डॉ. जी.एस. चौहान, संयुक्त सचिव, यूजीसी ने व्याख्यान दिया। मेंटरशिप में प्रौद्योगिकी का लाभ पर एआईसीटीई के सलाहकार एवं सदस्य सचिव डॉ. मोरे रामुलु ने अपनी प्रस्तुति दी। इसी प्रकार मेंटरशिप में सर्वाेत्तम अभ्यास और नवाचार – केरल से प्रमुख सीख विषय पर आयुक्त, केरल सरकार डॉ अरुण एस नायर, उच्च शिक्षा में मेंटरशिप पहल पर संस्थापक एवं सीईओ अशोका फेलो सुश्री अरुंधति गुप्ता, मेंटरशिप में अंतर्राष्ट्रीय सर्वाेत्तम अभ्यास भारत के लिए सीख विषय पर यूनेस्को के शिक्षाविज्ञ श्री जियान शी तेंग ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा तक पहुंच बनाने में मेंटरशिप अहम भूमिका निभा सकती है। नियामकीय दृष्टिकोण, तकनीकी नवाचार और स्थानीय स्तर पर अपनाए गए श्रेष्ठ प्रयोगों को साझा करते हुए वक्ताओं ने बताया कि मेंटरशिप से छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और समान अवसर मिल सकते हैं। केरल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह सुझाव दिया गया कि भारत में एक मजबूत मेंटरशिप फ्रेमवर्क तैयार किया जाए, जिससे कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

कार्यशाला के तृतीय एवं अंतिम सत्र में कौशल विकास और उद्यमिता के लिए समावेशी मेंटरशिप पर चर्चा किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता एनआईईएसबीयूडी के महानिदेशक डॉ. पूनम सिन्हा एवं सह-अध्यक्षता मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य कौशल विकास मिशन श्री पुलकित खरे ने किया।

इस सत्र में व्यावसायिक शिक्षा को सुलभ और समावेशी बनाने में मेंटरशिप की भूमिका पर चर्चा की गई। इसमें व्यावसायिक शिक्षा में मेंटरशिप ढाँचे के परिदृश्य का अन्वेषण, सर्वाेत्तम प्रथाओं की पहचान और कमजोर समूहों के छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा में एक मज़बूत मेंटरशिप ढाँचा बनाने हेतु सुझाव प्रस्तुत किया गया।

इस सत्र में कौशल और अवसर के लिए परामर्श राज्य से सीख विषय पर निदेशक, तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण ओडिशा श्री चक्रवर्ती सिंह राठौर ने और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में परामर्श विषय पर राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री मेहंदरा पायल ने अपने विचार रखे। इसी प्रकार उद्यमियों का मार्गदर्शन एक समावेशी दृष्टिकोण पर भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान के प्रो डॉ. अमित कुमार द्विवेदी, समानता के साथ कौशल तेलंगाना से सीख विषय पर कौशल एवं ज्ञान अकादमी तेलंगाना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री श्रीकांत सिन्हा एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए परामर्श पहल विषय पर टाटा स्ट्राइव के संचालन प्रमुख श्री शिलादित्य समद्दार ने अपनी प्रस्तुति दी।

सत्र में विशेषज्ञों ने कौशल शिक्षा और उद्यमिता में मेंटरशिप के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जुड़नी चाहिए। इसके लिए मेंटरशिप कार्यक्रम युवाओं को दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। तेलंगाना और ओडिशा राज्यों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार किए गए मॉडल से युवाओं को न केवल शिक्षा बल्कि रोजगार के अवसर भी मिले हैं। वक्ताओं ने उद्यमिता में समावेशी दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा कि यदि युवाओं को समय पर सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो वे नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

दोनों सत्रों से यह निष्कर्ष सामने आया कि चाहे उच्च शिक्षा हो या कौशल विकास, प्रत्येक स्तर पर मेंटरशिप छात्रों और युवाओं के लिए आत्मविश्वास, प्रेरणा और अवसरों का मार्ग प्रशस्त करती है। नीति आयोग ने इन विचारों के आधार पर एक राष्ट्रीय मेंटरशिप ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। कार्यशाला के अंत में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने समापन भाषण दिया और कहा कि शिक्षा और कौशल विकास के सभी स्तरों पर मेंटरशिप ढाँचा बनाना समय की मांग है। इसके बाद नीति आयोग के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी श्री आर.एन. मुंधे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री एस. भारती दासन, नीति आयोग के संयुक्त सचिव श्री के. एस. रेजिमोन, नीति आयोग के फेलो डॉ. आई. वी. सुब्बा राव, आईएएस (सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा तथा नीति आयोग के उप सचिव श्री अरविंद कुमार, सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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