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राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत मितानिन खण्डस्तरीय प्रतिनिधियों का एकदिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

अम्बिकापुर । संभागीय संयुक्त संचालक डॉ अनिल शुक्ला के निर्देशानुसार एवं सीएमएचओ डॉ पी एस मार्को के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत कोटपा एक्ट (सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम) 2003 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जिले को तम्बाकू के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु ब्लूमबर्ग परियोजना के सहयोग से संभाग स्तरीय मितानिन कार्यक्रम अंतर्गत विकासखण्ड मितानिन समन्वयक एवं स्वस्थ पंचायत समन्वयकों के लिए अंबिकापुर में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में संयुक्त संचालक डॉ अनिल शुक्ला ने ग्राम स्तर पर तम्बाकू नियंत्रण की नीतियों के अनुपालन के संबंध में सुझाव दिए। जिला नोडल अधिकारी डॉ शैलेन्द्र गुप्ता ने जिले में तम्बाकू नियंत्रण की गतिविधियें तम्बाकू नशा मुक्ति केन्द्र की सेवाओं तथा धूम्रपान मुक्त जिले के संबंध में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि तंबाकू उपयोग विशेषकर गैर धूम्रपान या चबाने वाला तंबाकू, गुडाखू, ग्रामीण क्षेंत्रों में अत्याधिक उपयोग किया जाता है। तंबाकू के सेवन से कैंसर समेत कई बीमारियां हो रही हैं, इसलिए तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता लाना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सबसे आवश्यक है कि युवा पीढ़ी को तंबाकू उत्पादों का सेवन करने से बचाएं। इसके लिए सामूहिक सहभागिता जरूरी है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, कोटपा अधिनियम 2003 की समस्त धाराओं के बेहतर क्रियान्वयन और जनसमुदाय की सहभागिता और अधिनियम की जानकारी के साथ-साथ जिले के समस्त शैक्षणिक संस्थानों को धूम्रपान मुक्त बनाए जाने के लिए सामूहिक योगदान आवश्यक है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग एवं अन्य नशा मुक्ति केन्द्र, सामाजिक संस्थाओं के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के लिए स्कूल, कालेज, संस्थान और शासकीय विभागों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ पुष्पेन्द्र राम द्वारा तम्बाकू नियंत्रण में मितानिनों के साथ-साथ अन्य विभागों की भूमिका एवं समन्वयक के संबंध में सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि धूम्रपान एवं तम्बाकू का उपयोग व गुटखा एवं तम्बाकू चबाना एक बहुत ही आम समस्या है, गुटखा चबाना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है, लेकिन इससे निकलना बेहद ज़रूरी है। गुटखा से न केवल मुंह का कैंसर होने का खतरा बढ़ता है, बल्कि यह शरीर के कई अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। गुटखा व तम्बाकू छोड़ना में कठिनाई हो सकती है, लेकिन यह असंभव नहीं है। सही मानसिकता, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही रणनीति के साथ आप गुटखे की आदत से छुटकारा पा सकते हैं। चिकित्सक के उचित परामर्श उपरांत निकोटीन रिप्लेसमेंट उत्पाद मददगार साबित हो सकते हैं, जो गुटखा छोड़ने को और भी आसान बना सकते हैं। तम्बाकू व धूम्रपान न केवल आपके शरीर को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आपके जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। इसीलिए, तम्बाकू रहित पदार्थ छोड़ने का सही समय अभी है। अपनी सेहत और अपने परिवार के लिए यह कदम उठाएं और स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ें।
संभागीय समन्वयक प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा सरगुजा संभाग के जिलों में तम्बाकू उपयोग की स्थिति सहित कोटपा एक्ट 2003 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही तम्बाकू मुक्त ग्राम पंचायत बनाये जाने हेतु जागरूकता अभियान चलाये जाने सुझाव दिया गया। इस अवसर पर संभाग के समस्त जिले से विकासखण्ड मितानिन समन्वयक एवं स्वास्थ्य पंचायत सचिव उपस्थित थे।

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