
कलेक्टर ने जल संकट से निपटने के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास, विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी नवाचारों के उपयोग तथा जनसहभागिता के साथ काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पानी के अनियंत्रित उपयोग और संरक्षण के पर्याप्त उपाय नहीं होने के कारण जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे भविष्य में पेयजल, कृषि एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए अभी से सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि गांव का पानी गांव में ही रहे इस अवधारणा को सशक्त बनाने हेतु नागरिकों में जागरूकता आवश्यक है। इसके लिए जनभागीदारी के माध्यम से सोखता गड्ढों का निर्माण, छोटे नदी-नालों की सफाई, लो-कॉस्ट इनोवेटिव मॉडल 5 प्रतिशत, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सहित अन्य जल संचयन तकनीकों को अपनाने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर श्री व्यास ने जल संचयन के लिए शासकीय भवनों, स्कूल-कॉलेजों एवं अन्य संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही नदी-नालों के जीर्णाेद्धार, बोरवेल रिचार्ज, ढलान एवं पहाड़ी क्षेत्रों में कंटूर ट्रेंच निर्माण, डबरी निर्माण, बोरी बंधान जैसे कार्यों को प्राथमिकता से करने को कहा। उन्होंने कटाव नियंत्रण और नदी तटबंधों को मजबूत करने के लिए गैबियन संरचनाओं की मरम्मत तथा चेक डैम की रिपेयरिंग कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा तालाबों की नियमित सफाई, खेल मैदानों जहां से पानी निकासी ज्यादा होती है वहां सोखता गड्ढा बनाने तथा कुओं के रिचार्ज पर विशेष ध्यान देने को कहा ।कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि सार्वजनिक रूप से उपयोग किए जा रहे बोरवेल के पास सोखता गड्ढा अनिवार्य रूप से बनाएं। इसके अलावा जल संचय जनभागीदारी समिति 2.0 के क्रियान्वयन हेतु कार्य योजना और पोर्टल के संचालन की भी जानकारी दी गई। साथ ही जल संरक्षण हेतु बनाए गए प्रत्येक स्ट्रक्चर का जियो टैगिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला एवं जनपद पंचायत के अधिकारी, पीएचई, जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।







