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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दक्षिणी आंध्र प्रदेश के सूखा ग्रस्त जिलों को लेकर समीक्षा बैठक की

प्राकृतिक खेती और पाम ऑयल मिशन को लेकर भी आंध्र प्रदेश के मंत्रियों व अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा
सूखा ग्रस्त क्षेत्रों के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर ‘एकीकृत कार्ययोजना’ बनाएंगे– शिवराज सिंह
नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दक्षिणी आंध्र प्रदेश के सूखा ग्रस्त जिलों को लेकर आंध्र प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्राकृतिक खेती और पाम ऑयल मिशन को लेकर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक का आयोजन पुट्टपर्थी के पीजीआरएस हॉल, कलेक्ट्रेट, श्री सत्य साईं जिले में किया गया।
इस बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि “आज पुट्टपर्थी में हमने आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री के साथ सूखा ग्रस्त जिलों को लेकर अहम बैठक की है। यहां की अपनी समस्याएं हैं। बारिश कम होती है, अक्सर सूखा पड़ता है और इसके कारण यहां किसान और खेती संकट में है। माननीय मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जी के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश सरकार ने – ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा देने से लेकर, हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने तक कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।”
आगे श्री शिवराज सिंह ने कहा कि “पुरानी सरकार ने केंद्र सरकार के पैसे को भी डायवर्ट करके यहां किसानों के साथ अन्याय किया। लेकिन वर्तमान सरकार काम कर रही है। विजनरी चीफ मिनिस्टर यहां पर हैं। तो हमारे मन में ये विचार आया कि इन जिलों की समस्या के समाधान के लिए– जो ये रायलसीमा के जिले हैं– एक तो लघु समाधान और दूसरा कुछ दीर्घकालिक योजना भी बनाई जाए, जिससे स्थायी समाधान निकल सके। इसलिए आज चर्चा करके हमने तय किया है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर इसका समाधान खोजेंगी।”
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि “विभिन्न उपायों में सबसे पहले– हम कृषि विभाग, आईसीएआर व ग्रामीण विकास की केंद्र सरकार की एक टीम– जिसमें आईसीएआर के वैज्ञानिक एवं बाकी अधिकारी शामिल होंगे– उन्हें यहां भेजा जाएगा। ताकि कृषि विभाग, आईसीएआर के वैज्ञानिक, ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विभाग, जिसमें वॉटरशेड भी सम्मिलित है, मिलकर सूखे की परिस्थिति में भी फसल पैदा करने के लिए योजना बना सकें।”
श्री चौहान ने कहा कि “वर्षा जल संचयन, पौधा रोपण का काम और जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर तुंगभद्रा और कृष्णा नदी से कैसे पानी आ सकता है, उस पर भी काम करेंगे। एकीकृत खेती जिसमें अलग-अलग: फल, फूल, सब्ज़ियां, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, पशुपालन शामिल हैं, उसके तहत भी कुछ योजनाएं बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ-साथ सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में अच्छा उत्पादन देने वाले बीजों की किस्में भी विकसित करने के लिए काम किया जाएगा।”
अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि “एकीकृत कार्ययोजना बनाने पर विचार-विमर्श किया गया है, जिस पर हम लोग राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। मेरा विश्वास है कि इन परिस्थितियों से हम सूखा ग्रस्त जिलों के किसानों को उबारेंगे।”

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