Ro no D15139/23

नौकरियों के भविष्य पर सम्मेलन: केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने में वैश्विक कार्यबल की कमी को दूर करने की भारत की क्षमता पर प्रकाश डाला

भविष्य की नौकरियों पर सम्मेलन से मुख्य निष्कर्ष : उद्योग कौशल केन्द्र बनने के लिए तैयार
नई दिल्ली । श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (एमओएलई) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से बुधवार 15 जनवरी को नई दिल्ली में “भविष्य की नौकरियों पर सम्मेलन” का आयोजन किया। इसका विषय भविष्य के कार्यबल को स्वरुप देना, गतिशील दुनिया में विकास को गति देना” था । इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों और विशेषज्ञों को उभरते रोजगार परिदृश्य पर विचार – विमर्श करने और भारत में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के लिए रणनीति तैयार करने के लिए आंमत्रित किया गया था।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि शिक्षा और रोजगार में समन्वय के लिए कौशल विकास हमारे प्रयासों के केंद्र में होना चाहिए। नवाचार को प्रोत्साहन देकर, उत्पादकता में वृद्धि कर और कार्यबल के लिए व्यक्तियों को तैयार करके, हम रोजगार सृजित कर रहे हैं और वैश्विक प्रतिभा केंद्र का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कौशल और मानकों की पारस्परिक मान्यता जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक कार्यबल की कमी को दूर करने की भारत की क्षमता पर भी प्रकाश डाला।
उद्योग-अकादमिक जगत के बीच मजबूत संबंधों को प्रोत्साहन देकर, हम भारत की अनूठी जरूरतों के अनुरूप कौशल मॉडल तैयार कर सकते हैं। कौशल को प्रमाणपत्रों से आगे बढ़कर उद्योग और स्वरोजगार क्षेत्रों की गतिशील मांगों को पूरा करने के लिए व्यक्तियों को व्यावहारिक विशेषज्ञता से लैस करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कौशल के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है – केवल प्रमाणपत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, लक्ष्य उद्योग में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक वास्तविक कौशल वाले पेशेवरों को विकसित करना होना चाहिए।
श्रम एवं रोजगार सचिव श्रीमती सुमिता डावरा ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे परिदृश्य में सफल होने के लिए तीन प्रमुख प्रश्न उभरे हैं: हम तेजी से तकनीक-संचालित नौकरी बाजार में आगे बढ़ने के लिए सुसज्जित डिजिटल रूप से कुशल कार्यबल कैसे विकसित करें? हम वास्तव में समावेशी कार्यबल बनाने के लिए कौन सी रणनीति अपना सकते हैं, जहां विविधता को महत्व दिया जाता है और सभी को समान अवसर दिए जाते हैं? इसके अतिरिक्त उद्योग पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं, तो हम अपने कार्यबल संस्कृति में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं और मूल्यों को कैसे एकीकृत कर सकते हैं?
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और हरित नौकरियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए कुशल और अनुकूलनीय कार्यबल महत्वपूर्ण है। श्रम-प्रधान उद्योगों को मजबूत करने से विविध जनसांख्यिकी के लिए समान अवसर सुनिश्चित होते हैं, जिनमें उन्नत शिक्षा तक सीमित पहुंच वाले लोग भी शामिल हैं।

  • Related Posts

    ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

    Election Results 2026 : बंगाल में अंतत: खेला हो ही गया. अभूतपूर्व परिणाम. ध्रुवीकरण के खेल में हिंदू वोटरों का पलड़ा भारी. एसआइआर का प्रभाव. तृणमूल के अतिवाद, उग्र कार्यशैली…

    Read more

    पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

    West Bengal Election Result: नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन इस बार बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा. इस बारे में लंबे समय से…

    Read more

    NATIONAL

    ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

    ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

    पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

    पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

    116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो

    116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ

    धरती के नक्शे से उसका नामोनिशान मिटा देंगे, अगर… अब ट्रंप ने ईरान को क्यों धमकाया?

    धरती के नक्शे से उसका नामोनिशान मिटा देंगे, अगर… अब ट्रंप ने ईरान को क्यों धमकाया?

    बंगाल में पहली बार हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण काफी प्रभावी साबित हुआ

    बंगाल में पहली बार हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण काफी प्रभावी साबित हुआ