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अतीश दीपंकर
ब्योरो चीफ,बिहार
बिहार के नेता प्रतिपक्ष
तेजस्वी यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी, आरएसएस, आरएसएस प्रमुख और एनडीए नेताओं पर बड़ा हमला बोला है।
आज पटना एयरपोर्ट पर आरक्षण को लेकर पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, दो केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी और चिराग पासवान 𝐑𝐒𝐒 के निर्देश पर विपरीत दिशाओं में बात कर 𝐁𝐉𝐏-𝐑𝐒𝐒 के आरक्षण खत्म करने के मूल उद्देश्य से ध्यान भटका कर आरक्षण सर्मथक जनभावना का आंकलन करना चाहते है।
प्रतिपक्ष के नेता श्री यादव ने कहा कि, जिनका खुद का स्वतंत्र वजूद नहीं होता वो ऐसे ही 𝐁𝐮𝐧𝐜𝐡 𝐨𝐟 𝐓𝐡𝐨𝐮𝐠𝐡𝐭𝐬 मानने वालों के निर्देशन में अभिनय करते हैं।
उन्होंने कहा कि, सर्वप्रथम तो आरक्षित कोटे से जीते ये मंत्री संविधान और आरक्षण विरोधियों की गोद में बैठ कर सत्ता का चरम सुख प्राप्त कर रहें है। इन्हें समाज और वैचारिकी से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आरक्षण से इन दोनों को सख़्त नफ़रत है तो ग़ैर आरक्षित सीटों से चुनाव लड़कर देख लें, ज्ञान चक्षु खुल जायेंगे।
आरक्षण विरोधी बीजेपी के साथ रहते नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टियों की क्या स्पष्ट विचारधारा है ? यह कोई नहीं जानता ?
अगर ये पार्टियां आरक्षण समर्थक हैं तो, हमारी सरकार में बिहार में बढ़ाई गयी 𝟔𝟓 % आरक्षण सीमा को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल क्यों नहीं कराते ?
तेजसवी ने विपक्ष पर करा हमला करते हुए आरोप लगाया कि, यह लोग घोर अवसरवादी और सुविधाभोगी नेता हैं। यह लोग आरक्षण को बढ़वायेंगे नहीं और विचारधारा की राजनीति करेंगे नहीं। ये लोगों मंत्री पद, सुरक्षा और बंगला प्राप्त करने के लिए येन -केन प्रकारेण सत्ता में बने रहेंगे।
तेजसवी यही नहीं रूके। उन्होंने आरएसएस प्रमुख पर भी हमला बोलते हुए कहा कि, मोहन भागवत ने भी पहले आरक्षण समीक्षा की बात की थी।
बिहार ने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत को कान पकड़ कर अच्छे से उठक- बैठक करवा दी थी। अब फिर करेंगे तो बिहारी लोग 𝐑𝐒𝐒/𝐁𝐉𝐏 का मुर्गा बना देगा।
देखने वाली बात होगी कि, आरक्षण पर तेजसवी यादव के बयान पर बीजेपी, आरएसएस और एनडीए नेताओं की क्या प्रक्रिया आती है ?
फिलहल आरक्षण को लेकर दोनों तरफ से उठा -पटक जारी है।
इन सबों के बीच बड़ी बात यह होगी कि, आरक्षण को लेकर अंतिम निर्णय क्या आता है ?
फिलहाल आरक्षण को लेकर बयानों का दौर जारी है…








