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प्रोजेक्ट उन्नति के प्रशिक्षण से ग्रामीणों को मिल रहा है आर्थिक लाभ

ललिता यादव को बकरी पालन से 60,000 रुपए की हो रही है सालाना अतिरिक्त आय
मनरेगा और प्रोजेक्ट उन्नति का योगदान
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने ग्रामीण भारत के लाखों लोगों के जीवन में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिले में महात्मा गांधी नरेगा के प्रोजेक्ट उन्नति के तहत एक वर्ष में 100 दिवस का रोजगार पूर्ण करने वाले परिवारों को उनकी अभिरुचि के अनुसार विभिन्न गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया गया है। जिले में प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल विकास और आजीविका संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। यह कहानी कोरबा जिले के विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पंचायत लालपुर की श्रीमती ललिता यादव की है, जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाकर अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दी।
प्रशिक्षण से शुरुआत
ललिता यादव ने प्रोजेक्ट उन्नति के अंतर्गत आरसेटी द्वारा आयोजित कृषि उद्यमी का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण में उन्हें कृषि सखी बनने के तरीके, जैविक खाद बनाने, उन्नत कृषि तकनीकों, बकरी पालन, बकरी आश्रय की स्वच्छता, बकरियों की बीमारियों और उनके उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में कैसे विकसित किया जाए, इसकी भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
सफलता की ओर कदम
प्रशिक्षण से प्रेरित होकर, ललिता ने बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया। अपनी मेहनत और प्रशिक्षण के ज्ञान से उन्होंने व्यवसाय को निरंतर बढ़ावा दिया। आज उनके पास 40 बकरा-बकरी हैं। इन बकरों और बकरियों की बिक्री से उन्हें सालाना लगभग 60,000 रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता
ललिता, जो केवल आठवीं तक पढ़ी हैं, ने बताया कि अब वह मनरेगा के कार्यों के साथ-साथ कृषि और बकरी पालन भी करती हैं। बकरी पालन से उन्हें हर महीने लगभग 5,000 रुपये की आय होती है। पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी और जीवनयापन मुश्किल था, लेकिन प्रोजेक्ट उन्नति के प्रशिक्षण ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
प्रेरणा और ग्रामीण विकास
ललिता का कहना है कि प्रोजेक्ट उन्नति जैसे कार्यक्रम न केवल ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहे हैं। वह अब अन्य महिलाओं को भी बकरी पालन के व्यवसाय के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका यह कदम न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक प्रेरणा बन गया है।
निष्कर्ष
ललिता यादव की यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर किस प्रकार ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकती हैं। मनरेगा और प्रोजेक्ट उन्नति जैसे कार्यक्रम न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाते हैं।

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