Ro no D15139/23

सपनों को मिले पहिए : भीमा मारकंडे की बैसाखी से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक यात्रा

 

राजनांदगांव 05 मई 2026। कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक बाधाएं केवल एक पड़ाव मात्र रह जाती हैं, मंजिल नहीं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम हरदी के रहने वाले भीमा मारकंडे की कहानी आज संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं के लिए एक मिशाल बन गई है।

*जब वक्त ने ली कठिन परीक्षा*

भीमा की जिंदगी तब बदल गई जब हैदराबाद में निर्माण कार्य (मजदूरी) के दौरान वे ऊंचाई से गिर गए। कमर में आई गंभीर चोट ने उनके चलने-फिरने की शक्ति छीन ली। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ 9 वर्ष और 4 वर्ष दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उठाना पहाड़ तोडऩे जैसा था। बैसाखी ही उनका एकमात्र सहारा थी, लेकिन मंजिल अभी दूर थी।

*उम्मीद की नई किरण -समाज कल्याण विभाग की पहल*

भीमा ने हार मानने के बजाय स्वावलंबन का रास्ता चुना। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया। राजनांदगांव के मोतीपुर में 4 मई 2026 को आयोजित सुशासन तिहार मे मिला यह आधुनिक उपकरण उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी आजादी साबित हुआ।

*मजबूरी बनी मजबूती : भीमा की कहानी, आत्मनिर्भरता की जुबानी*

*अब बाधाएं नहीं रोकेंगी रास्ता*

समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदान की गई बैटरी चलित ट्राइसाइकिल और बैसाखी से भीमा के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव का रास्ता मजबूत होगा। भीमा अब रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों तक बिना किसी मदद के जा सकेंगे। दूसरों पर निर्भरता खत्म होने से भीमा अब समाज की मुख्यधारा में एक सक्रिय नागरिक की भूमिका निभा सकेगा। अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए अब वे शारीरिक बाधाओं को पीछे छोड़ चुके हैं। भीमा शासन द्वारा दिए गए मदद की प्रशंसा करते हुए कहते है कि राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने आमजनों की समस्याओं का निराकरण सुशासन तिहार के माध्यम से कर रहे है। मैं मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद करता हूँ।

*भीमा की कहानी के साथ-साथ जिले के अन्य दिव्यांगों के लिए भी अच्छी खबर*

समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक सुश्री वैशाली मरड़वार ने बताया कि जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग की विशेष योजना के तहत नवाचार करते हुए 40 से 79 प्रतिशत तक के दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी मोटराइज्ड साइकिल के पात्र होंगे। इसके लिए ऑलिम्को के सीएसआर मद से जिले के 109 पात्र दिव्यांगों को यह सुविधा प्रदान की जाएगी। भीमा मारकंडे के हस्ताक्षर आज उनके अटूट संकल्प की गवाही देते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मन का दृढ़ निश्चय मिलकर किसी भी अंधेरी राह को रोशन कर सकता है। भीमा अब रुकने वाले नहीं हैं, वे उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

  • Related Posts

    संवाद से समाधान: कमराखोल में मुख्यमंत्री ने दूर की बिजली बिल की चिंता

      ‘बकाया बिल से घबराने की जरूरत नहीं, समाधान योजना से मिलेगी राहत’ – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय रायपुर 5 मई 2026/प्रदेश के मुखिया  विष्णुदेव साय का 4 मई को सुदूर…

    Read more

    सुशासन तिहार: सरोधी की चौपाल में दिखी बदलाव की कहानी महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई केकती बाई की जिंदगी

      रायपुर, 5 मई 2026/सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम जनजीवन…

    Read more

    NATIONAL

    ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

    ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

    पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

    पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

    116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो

    116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ

    धरती के नक्शे से उसका नामोनिशान मिटा देंगे, अगर… अब ट्रंप ने ईरान को क्यों धमकाया?

    धरती के नक्शे से उसका नामोनिशान मिटा देंगे, अगर… अब ट्रंप ने ईरान को क्यों धमकाया?

    बंगाल में पहली बार हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण काफी प्रभावी साबित हुआ

    बंगाल में पहली बार हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण काफी प्रभावी साबित हुआ