
छत्तीसगढ़ विधानसभा मे अजीब दृष्य देखने को मिला। सत्र के दौरान सबसे अधिक जिसने सरकार के घेरा वे इस सरकार के अपने ही थे।
यानि सबसे अधिक अपने ही मंत्रियों को प्रश्नों के घेरे मे उलझाया वो भाजपा के ही विधायक थे। भाजपा के तेंजतर्रार विधायकों ने अपने नवसिखिये और कुछ पुराने मंत्रियों की क्लास लगा दी।
दूसरी ओर कांग्रेसी विधायकों ने शांति से काम लिया। लगता है कांग्रेस अंदर से शांत है। क्या इसे मनोबल से जोड़ा जा सकता है…. देश में कुछ करारी हारों से अंदर से टूट गयी है कांग्रेस।
छत्तीसगढ़ सरकार की
प्रशंसनीय कार्यवाही
छत्तीसगढ़ के लिये ये आम बात नहीं है…. किसी पत्रकार की हत्या। मगर बदलते परिवेश में लोग अपने नुकसान को देखकर ऐसा दुस्साहस कर देते हैं। हालांकि इसकी बहुत ही बड़ी कीमत अपराधियों को चुकानी पड़ती है।
बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या करने वाले ने उनके द्वारा चलाई गयी किसी खबर से नाराज होकर उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि जल्दी ही आरोपी को इसका पछतावा भी हुआ होगा। क्यांेकि आरोपी को जितना नुकसान मुकेश की खबर से नहीं हुआ उससे कहीं अधिक नुकसान मुकेश की हत्या से हो गया।
ठेका खत्म, एकाउन्ट सीज़, अवैध निर्माण ध्वस्त, ब्लैक लिस्टेड।
बदलते माहौल और सरकार के मुखिया के रूख को देखकर आरोपी को और अधिक नुकसान हुआ है और आगे भी होगा, ये तय है। इसके अलावा कोर्ट का न्याय भी बाकी है।
कुल मिलाकर समाज में अपनी धौंस दिखाने और पत्रकार से बदला लेने के मंसूबे की जबर्दस्त कीमत चुकानी पड़ी है।
ईधर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की घोषणा कर दी है। जिससे पत्रकार अब और निर्भय होकर काम कर सकेंगे।
गलती प्रशासन की, सजा अर्जुन को
देश में कानून तो सभी तरह के और सभी के लिये हैं, लेकिन सरकार और खासतौर पर अफसर शकल, कीमत और दबाव देखकर काम करते हैं और अक्सर ये होता है कि गलती प्रशासन की होती है और बलि का बकरा किसी और को बनाया जाता है। बाद में आरोपी चाहे छूट जाए मगर कोर्ट कचहरी के चक्कर में पिस तो जाता है।
‘पुष्पा 2’ सफलतम फिल्म के सर्वाधिक लोकप्रिय हीरो अल्लू अर्जुन के साथ भी यही हो रहा है। एक समारोह में उन्हें देखने, मिलने को लालायित प्रशंसकों में मची भगदड़ से एक महिला की मौत हो गयी। लोगों में आक्रोश फेल गया। बस फिर क्या था लोगों को शान्त करने के लिये अपने हीरो को ही धर लिया पुलिस ने।
कोई पूछे उनसे कि यदि समारोह की सूचना पुलिस को थी तो बंदोबस्त अल्लू को करना था क्या ? क्या डण्डा लेकर वो खुद वहां खड़े हो जाते ? सबको पता है कि व्यवस्था का काम पुलिस का है, प्रशासन का है। फिर अल्लू का क्या दोष ? कल को लोकप्रिय कलाकार से मिलने कोई छत से कूद जाएगा तो फिर पुलिस उस कलाकार को पकड़ लेगी ?
बाद में अल्लू कोर्ट से छूट जाएंगे ये लगभग तय है लेकिन चिक्कड़पल्ली थाने ने उन्हें हर रविवार 10 से एक बजे के बीच जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। ये क्या कम सजा है ?
स्कूटर कंपनियों पर शिकंजा कसे सरकार
दूसरी ओर जहां जुर्म बनता है वहां पर प्रशासन दाएं-बाएं होने लगता है। मसलन रतलाम का ही मामला देख लीजिये। एक ईस्कूटर को चार्जिंग में लगाकर परिवार बर्थडे पार्टी मनाकर रात को सोया तो आधी रात को स्कूटर मे बैटरी फटने से आग लग गयी।
इस आग में 11 साल की बच्ची जलकर मर गयी। इस मामले मे कौन दोषी है ? साफतौर पर कंपनी।
मृत बच्ची के पिता का कहना है कि वे कंपनी के खिलाफ केस करेंगे यानि सरकार केस नहीं करेगी,पीड़ित पक्ष को करना होगा।
सरकार जुर्म दर्ज नहीं कर रही। काम सरकार का है कि वो कंपनियों पर शिकंजा कसे और क्वालिटी मे सुधार लाए। दूसरा घटना हुई है तो जवाबदार के प्रति कार्यवाही भी होगी जिसे सरकार को करना चाहिये आम आदमी के लिये केस करना दूसरा झटका साबित होगा।
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जवाहर नागदेव वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, विश्लेषक,
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’









