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जाने चले जाते हैं कहां, दुनिया से जाने वाले;अवार्ड मिलेगा तो कच्छे में चला जाउंगा-धर्मेन्द्र, असरानी, कर्ण, दोस्त सलीम वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

धर्मेन्द्र जन्मदिन मंगलमय हो’,
आप अपने से लगते हैं। आपका परिवार भी डिसेन्ट है। परिवार के साथ जब भी बैठे तो आपके बच्चे भी संस्कारी और गंभीर दिखते हैं। व्यर्थ की बकवास, उछल-कूद, सामान्य से अधिक हंसना जिसे आम बोलचाल में हम लोग ‘जताना’ बोलते हंै नहीं दिखती।

शोले के हीरो
जिसमें एक ने इतिहास लिखा
और दूसरा लिख रहा है

इतिहास बनाने वाली फिल्म शोले, जिसने अप्रत्याशित झण्डे गाड़े। इस बाबत् एक दिलचस्प बात एक प्रोग्राम मे धर्मेन्द्र ने बताई कि उस सुपर स्टार ने दूसरे भविष्य के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन को शोले में रोल दिलवाया था। ये बात उन्होंनें स्वीकारी। पहले ये रोल शत्रुहन सिन्हा को मिल रहा था ।

अपने जीवन की कुछ घटनाएं शेयर करते उन्होंने कहा था कि एक फिल्म बननी थी अमर अकबर एंथोनी। तब वे धरमवीर में भी काम कर रहे थे। 16 घंटे बीस घंटे काम कर रहे थे। थक जाते थे। बकौल धर्मेन्द्र मैने मनमोहन से कहा यार ये तुम बना लो किसी के साथ, मैं नेक्सट कर लूंगा। तो वो नाराज हो गये।

जब धर्मेन्द्र से ये कहा गया कि अमर अकबर एंथोनी अच्छी फिल्म थी। कर लेनी थी।

तो वो बोले ‘अच्छी थी। कर भी लेते तो क्या हो जाता। ‘सबकुछ पाकर भी हासिल ए ज़िंदगी कुछ भी नहीं, मैने देखे हैं एक से एक सिकंदर खाली हाथ जाते हुए’। यहां तो ये भी मिल गया, वो भी मिल गया, वो भी मिल गया। लोगों के दिलों में जो प्यार मिल गया इससे बड़ी कोई चीज नहीं।

मुझे एवार्ड नहीं मिला
मिलता तो मैं कच्छे भी चला जाता

सहज, इंसानियत से लवरेज धर्मेन्द्र ने अवार्ड मिलने पर हंसते-हंसते कहा कि मुझे 37 साल हो गये, मैें हर साल नया सूट सिलवाया करता था उसकी मैचिंग टाई ढूंढता था इस साल मुझे अवार्ड मिल जाए, लेकिन नहीं मिला। कभी नहीं मिला।

मैने सिक्सटीस में सत्यकाम की, अनुपमा की, फूल और पत्थर की, बहुत सी फिल्में गोल्डन जुबली हुईं,जुबली हुईं, लेकिन मुझे अवार्ड नहीं मिला उसके बाद मैने सूट सिलवाने बंद कर दिये।
मैने सोचा यार टीशर्ट पहन लूं, बुला लेंगे तो ऐसे ही चला जाउंगा नहीं तो कच्छे के साथ चला जाउंगा। बहरहाल फिर भी मुझे अवार्ड नहीं मिला।

आज 37 साल के बाद ये ट्राॅफी मिली है मुझे। इसमें मै पिछले सालों की पंद्रा ट्राफी देख रहा हूं जो मुझे मिलनी चाहिये थी।
ये है कहानी उस इंसान की जो सही अर्थों में इंसान था। आज उनका जन्मदिन है।
बहुत-बहुत बधाई धर्मेन्द्रजी।

असरानी के निधन पर धर्मेन्द्र ने कहा
तुम्हारे जैसे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं

शोले ने कई कलाकारों को कई मौके दिये और शानदार ये रहा कि सारे के सारे उस पैमाने पर खरे उतरे। बात करें अंग्रेजों के जमाने के जेलर की तो लीेक से हटके सरकारी कैरेक्टर पर असरानी खरे उतरे। मानो उनके लिये ही लिखा गया था ये रोल।

मेरे अपने मे शत्रुहन सिन्हा की गुण्डों की गैंग में असरानी जमे तो अभिमान में अमिताभ के गंभीर पीए और दोस्त के रोल में भी जान डाल दी।
कादर खान के साथ तो कई फिल्मों में इतनी काॅमेडी दिखाई कि लगता ही नहीं है कि ये वही कलाकार है।
अफसोस पिछले दिनों असरानी भी हमारे बीच नहीं रहे।

कई महाभारत में कई कर्ण देखे
पर पंकज धीर जैसे ही रहे होंगे कर्ण

रौबदार व्यक्तित्व, धमाकेदार डायलाॅग डिलीवरी के मालिक पंकज धीर कई वर्षांे से कैंसर से जूझ रहे थे। एक बार जीतकर लौट भी आए थे लेकिन नियती को ये मंजूर नहीं हुआ और दोबारा कैंसर हो गया जिसमें वो हार गये।
सर्पोिर्टंग कैरेक्टर हो या विलेन पंकज धीर लगातार छाप छोड़ते रहे।

छत्तीसगढ़ी कलाकार सलीम
मस्तमौला, यारों का यार

 

दुर्गा काॅलेज और बाद मे दाबके लाॅ काॅलेज में पढ़ते समय सलीम से मुलाकात हुई। डबल एमए करने वाले सलीम ने शादी से बचने के जबर्दस्ती दूसरी बार एमए किया।
हालांकि बलि का बकरा कब तक खैर मनाता। अंततः पढ़ाई पूरी हुई और ज़िंदगी की शुरूआत…. ।

उनके अनुसार पत्नी के सहयोग के बिना इस मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं था।   ने इकतरफा सहयोग किया।
मेरी मां भी छत्तीसगढ़ी मानिकपुरी थीं तो वे भी मुझे बहुत प्रोमोट करती थीं।

मुझे सलीम के साथ एक टेलीफिल्म में काम करने का सौभाग्य मिला। सलीम ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का रोल किया था जो एक डाक बंगले में चैकीदार के रूप में कार्यरत होता है।

उसके बेटे को नौकरी के लिये किये जा रहे प्रयासों के दरम्यान एक अधिकारी उन्हें कह देता है कि उस समय के चोर-लुटेरे भी जेल गये और सर्टिफिकेट लेकर अब खुद को क्रांतिकारी बता रहे हैं।

इस डायलाॅग को सुनकर सदमा लगने से चैकीदार की मौत हो जाती है। उस दृष्य को कुछ इस तरह से सलीम ने जीवंत कर दिया कि रौंगटे खड़े हो गये।

इसके अलावा भी कुछ बेहतरीन यादें सलीम के साथ जुड़ी हैं। वो एक बेहतरीन दोस्त था।

जब भी अपनी जीवनी लिखूंगा या याद करूंगा तुम उसका एक अहम पन्ना रहोगे दोस्त। ————————–
जवाहर नागदेव,
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700

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