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घरों की बाड़ी बनी महिलाओं की तरक्की की राह

 

बाड़ी में रोपित औषधि पौधे बने अतिरिक्त आय का साधन

रायपुर, 11 मार्च 2026/ घरों की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण कर महिलाओं की नियमित आय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएँ घर से बाहर जाकर काम नहीं कर पातीं, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पाती। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने ऐसी योजना तैयार की है, जिससे महिलाएँ घर पर रहकर ही रोजगार प्राप्त कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड, रायपुर द्वारा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक नवाचार योजना शुरू की गई है।

*औषधीय पौधे सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं*

योजना के तहत महिलाओं को उनकी बाड़ी में लगाने के लिए बाजार में मांग वाले तीन प्रमुख औषधीय पौधे सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। इन पौधों की देखभाल अपेक्षाकृत कम होती है और इन्हें घर के अन्य कामों के साथ आसानी से संभाला जा सकता है।
अश्वगंधा की फसल लगभग 6 माह में तैयार हो जाती है, जबकि सतावर की उपज लगभग 24 माह में और सिंदूरी से प्राप्त उपज करीब 36 माह बाद मिलने लगती है। इन तीनों पौधों से बनने वाले उत्पादों की बाजार में लगातार मांग रहती है, इसलिए इनके कच्चे उत्पादों का विपणन आसान होता है। बोर्ड ने इसके लिए अशासकीय संस्थाओं के साथ अनुबंध कर विपणन की व्यवस्था भी पहले से सुनिश्चित कर दी है।

*कम लागत में मिलता है अच्छा उत्पादन*

बाड़ी में लगभग 40 से 50 सिंदूरी के पौधे लगाए जा सकते हैं, जिनके बीच करीब 10 फीट की दूरी रखी जाती है। इन पौधों के बीच में लगभग 500 सतावर के पौधे लगाए जा सकते हैं। इस प्रकार कम जगह में भी अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

*27 ग्रामों की 509 महिलाओं की बाड़ी में की हैं औषधि पौधे रोपित*

इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट धमतरी जिले में शुरू किया गया है। यहां 27 ग्रामों की 509 महिलाओं की बाड़ी में लगभग 82 हजार सतावर और 39 हजार सिंदूरी के पौधे लगाए गए हैं। समय-समय पर निरीक्षण कर महिलाओं को तकनीकी मार्गदर्शन और संग्रहण से संबंधित जानकारी भी प्रदान की जाती है।

*महिलाओं को सालाना करीब 20 हजार से 30 हजार रुपए तक हो रहीं है अतिरिक्त आय*

बोर्ड को उम्मीद है कि लगभग 24 माह बाद इस योजना से जुड़ी महिलाओं को सालाना करीब 20 हजार से 30 हजार रुपए तक की अतिरिक्त आय प्राप्त होने लगेगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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