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हौसला, हुनर और योजनाओं के सहारे महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

रायपुर, 27 मार्च 2026 (IMNB NEWS AGENCY) छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का छोटा सा गांव मनियारी आज एक बड़ी सीख दे रहा है- अगर इरादे मजबूत हों और सही मौके मिल जाएं, तो बदलाव दूर नहीं होता। यहां की पांच महिलाओं ने अपने साहस, आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पूरे गांव में नई सोच की शुरुआत कर दी।

इस बदलाव की शुरुआत हुई अनुसूया साहू से। बचपन से सिलाई में माहिर अनुसूया के पास हुनर तो था, लेकिन आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के चलते वह आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनका सपना कहीं दब सा गया था। मार्च 2024 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं को 1000 हजार रूपए की प्रत्येक माह आर्थिक मदद दिए जाने के उद्देश्य से शुरू की गई महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई। हर महीने मिलने वाली इस सहायता राशि को खर्च करने के बजाय उन्होंने बचाने का फैसला किया। छह महीने की बचत के बाद उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और घर से ही काम शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटी थी, कपड़ों की आल्टरिंग और साधारण सिलाई, लेकिन काम की गुणवत्ता ने जल्द ही उन्हें पहचान दिला दी।

अनुसूया की कोशिशों ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया। ओमकारेश्वरी साहू ने उनसे सिलाई सीखी और अपना काम शुरू किया। इसके बाद पार्वती, गंगा और हेमिनी भी जुड़ती चली गईं। देखते ही देखते यह पहल एक मजबूत महिला समूह में बदल गई, जहां सहयोग और सीखने की भावना ने इसे आगे बढ़ाया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इन महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की जानकारी दी और पंजीकरण में मदद की। योजना के तहत मिली 5000 रुपये की सहायता राशि का उपयोग महिलाओं ने सिलाई मशीन खरीदने और अपने काम को विस्तार देने में किया। सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग ने इनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी। आज ये पांचों महिलाएं मिलकर एक सफल सिलाई केंद्र चला रही हैं। वे महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के लिए कपड़े तैयार कर रही हैं। समय पर काम और बेहतर गुणवत्ता के कारण गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनकी पहचान बन चुकी है।

इस पहल से उनकी आय में वृद्धि हुई है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब वे परिवार के फैसलों में भी बराबरी से भागीदारी निभा रही हैं। इन महिलाओं की सफलता अब गांव की अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ वे समाज में नई पहचान बना रही हैं।

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