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बोरी वाली खाद की झंझट से मुक्ति, नैनो तकनीक ने बदली नागपुरा के किसान भगत राम की तकदीर

*लिक्विड नैनो उर्वरकों से कृषि लागत हुई आधी, उत्पादन और मुनाफे में हुआ उल्लेखनीय इजाफा*

 

रायपुर, 05 जून 2026/ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर दुर्ग जिले के ग्राम नागपुरा के किसान भगत राम साहू ने यह साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक खेती से कम लागत में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी अत्याधुनिक तरल उर्वरकों के उपयोग ने उनकी खेती की तस्वीर ही बदल दी है।

 

*समय और धन दोनों की होती थी अधिक खपत*

 

भगत राम बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे। खेतों तक भारी-भरकम खाद की बोरियां पहुंचाना, उनका भंडारण करना और फिर खेतों में उपयोग करना न केवल श्रमसाध्य था, बल्कि इसमें समय और धन दोनों की अधिक खपत होती थी। कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का उपयोग शुरू किया। शुरुआत में छोटी शीशियों में मिलने वाली इस खाद को लेकर उन्हें संदेह था, लेकिन परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर निकले।

 

*धान की फसल हुई मजबूत और रोग प्रतिरोधी*

 

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव के बाद उनकी धान की फसल अधिक हरी-भरी, मजबूत और रोग प्रतिरोधी दिखाई देने लगी। पौधों की वृद्धि में सुधार हुआ और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इतना ही नहीं, उन्होंने टमाटर, लौकी और अन्य सब्जी फसलों में भी नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग किया, जिससे फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में अच्छे दाम प्राप्त हुए।

 

*उर्वरक की बर्बादी कम, पोषक तत्व हुए अधिक प्रभावी*

 

भगत राम के अनुसार नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये सीधे पत्तियों के माध्यम से पौधों को पोषण उपलब्ध कराते हैं। इससे उर्वरक की बर्बादी कम होती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से मिलते हैं। इसके साथ ही परिवहन, भंडारण और श्रम पर होने वाला खर्च भी काफी घट गया है।

 

*अन्य किसानों को भी नैनो तकनीक अपनाने कर रहे प्रेरित*

 

कम लागत में अधिक उत्पादन मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है। अब वे अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास के किसानों को भी नैनो तकनीक आधारित खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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