
West Bengal Bureaucracy De-Trinamoolisation: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार ने नबान्न (सचिवालय) से नौकरशाही का डी-तृणमूलिफिकेशन (De-Trinamoolisation) शुरू कर दिया है. इसका मतलब यह है कि तृणमूल समर्थक और ममता बनर्जी के वफादार आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया जा रहा है.
मलाईदार पदों पर बैठे अफसरों में हड़कंप
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को पूर्ववर्ती सिंडिकेट के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए ‘360-डिग्री व्यू’ रणनीति के तहत एक्शन लेना शुरू किया है, जिससे सालों से मलाईदार पदों पर बैठे अफसरों में हड़कंप मच गया है.
West Bengal Bureaucracy De-Trinamoolisation: बदले जा रहे हैं ममता के पसंदीदा चेहरे
प्रशासनिक सूत्रों की मानें, तो ममता बनर्जी सरकार के दौरान जो शीर्ष नौकरशाह नीति-निर्धारण से लेकर गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर एकछत्र राज कर रहे थे, उन्हें गैर-महत्वपूर्ण विभागों में ट्रांसफर किया जा रहा है. नयी सरकार उन ईमानदार आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को मुख्यधारा में वापस ला रही है, जिन्हें टीएमसी शासन में कथित तौर पर प्रताड़ित या दरकिनार किया गया था. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे अनुभवी अधिकारियों को गृह, विजिलेंस और जिला मजिस्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण पद दिये जा रहे हैं.
पुलिस-नेक्सस पर शुभेंदु सरकार का कड़ा प्रहार
खुफिया विभाग (IB) से मिले गुप्त इनपुट्स के बाद उन पुलिस कप्तानों (SPs) और कमिश्नरों की एक लिस्ट तैयार की गयी है, जिन पर पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ दल के नेताओं और सिंडिकेट माफिया को कथित रूप से खुला संरक्षण देने का आरोप था. सूत्रों का दावा है कि सिर्फ तबादले ही नहीं, बल्कि कुछ दागी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं की गुप्त विजिलेंस जांच भी शुरू हो सकती है.









