
कोरबा 19 मई 2026/जिले के निवासी अजय कुमार देवांगन पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई के कार्य में कुशल थे, लेकिन संसाधनों की कमी और आधुनिक तकनीकों का अभाव उनके व्यवसाय को आगे बढ़ने नहीं दे रहा था। उनकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि वे अपने कौशल को नए स्तर तक ले जा सकें। इसी बीच उन्हें छत्तीसगढ़ शासन की पी.एम. विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत बेसिक टेलर दर्जी प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला।
उन्होंने सात दिनों का यह प्रशिक्षण पूरा किया, जिसके बाद उन्हें चार हजार रुपये की स्टाइपेंड राशि और एक लाख रुपये तक का बिना गारंटर ऋण प्राप्त हुआ। यह सहायता उनके लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हुई। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने अपने व्यवसाय को धीरे-धीरे व्यवस्थित करना शुरू किया और काम की गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास किया।
प्रशिक्षण में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा, जिसके कारण लाइवलीहुड कॉलेज कोरबा द्वारा उन्हें पंद्रह दिनों के उन्नत प्रशिक्षण के लिए चुना गया। इस प्रशिक्षण में उन्हें आधुनिक सिलाई तकनीकों, नए प्रकार के फैब्रिक कटिंग, आकर्षक डिज़ाइन तैयार करने और नवीन उपकरणों के प्रयोग की विधियां सीखने का अवसर मिला। इस अवधि में उन्हें प्रतिदिन पाँच सौ रुपये की दर से सात हजार पाँच सौ रुपये का स्टाइपेंड और एक हजार रुपये का यात्रा भत्ता प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण के बाद अजय कुमार का आत्मविश्वास और भी बढ़ गया। अब वे न सिर्फ पारंपरिक डिज़ाइन बल्कि आधुनिक फैशन की मांग के अनुरूप परिधान तैयार करने लगे। उनके काम की गुणवत्ता बढ़ी, सिलाई का समय कम हुआ और ग्राहकों का विश्वास भी मजबूत होने लगा। परिणामस्वरूप उनके व्यवसाय में निरंतर वृद्धि होने लगी और उनकी मासिक आय में अच्छा सुधार देखने को मिला।
सरकार की आगामी सहायता के रूप में उन्हें दो लाख रुपये तक का बिना गारंटर ऋण भी प्राप्त होगा, जिसके माध्यम से वे अपने कार्यस्थल का विस्तार करने, नई मशीनें खरीदने और ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। आज श्री अजय कुमार पारंपरिक कारीगर से एक सफल उद्यमी के रूप में उभर रहे हैं और अपने परिवार तथा समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही अवसर, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग किसी भी व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकते हैं। श्री अजय कुमार देवांगन की सफलता न सिर्फ उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हुनर को अवसर मिले तो वह उजाला फैलाने में देर नहीं करता।









