महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी
2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत में राजनीति के स्वरूप को बदलने का ऐतिहासिक अवसर है। हालांकि इसका क्रियान्वयन 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संभव है,…
Read moreमुर्गी बहन है और बकरा भाई, दीपक बैज की मानहानि, कौन ठोक रहा भारतविरोधियों को, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….
पण्डित झण्डू के मित्र मियां बण्डू के पड़ोस मे रहने वाले एक शख्स की मुर्गियां रोज गायब हो रही थीं। एक दिन उसने मोहल्ला सर पर उठा लिया। शक के…
Read moreप्रकृति का रौद्र रूप कहीं बाढ़ कहीं भूस्खलन। सटीक आपदा प्रबंधन की दरकार। लेख संजीव ठाकुर
प्रकृति का रौद्र रूप कहीं बाढ़ कहीं भूस्खलन। सटीक आपदा प्रबंधन की दरकार।। भारत में वर्षाकाल मे…
Read moreबरिंदा से रीता तक का सफर : आपातकाल के झंझावात में दीये की टिमटिमाती लौ के सहारे भूमिगत प्रतिरोध की कहानी (संस्मरण : बृंदा करात, अनुवाद : संजय पराते)
पचास साल पहले, स्वतंत्र भारत को तानाशाही का पहला अनुभव हुआ था। इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल की घोषणा, मौलिक अधिकारों के निलंबन, सभी प्रकार की असहमतियों का निर्मम दमन और…
Read moreऑपरेशन सिंदूर से उभरी भारत की वैश्विक दमदार छवि 0 लेख संजीव ठाकुर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के जवाबी हमले से पाकिस्तान के 9 एयरबेस की तबाही और लगभग 100 दुर्दांत आतंकवादी मारे जाने के बाद भारत की छवि विश्व में एक…
Read more(साहित्य का मंच या शिकार की मंडी?) नई लेखिका आई है — और मंडी के गिद्ध जाग उठे हैं
नई लेखिकाओं के उभार के साथ-साथ जिस तरह साहित्यिक मंडियों में उनकी रचनात्मकता की बजाय उनकी देह, उम्र और मुस्कान का सौदा होता है — यह एक गहरी और…
Read moreबाह्य तथा आंतरिक सुरक्षा के खतरे ,लेख संजीव ठाकुर
भारत संप्रभुता एकता तथा अखंडता का वैश्विक स्वच्छ एवं साफ-सुथरी छवि वाला एकमात्र बड़ा लोकतांत्रिक देश है। अमेरिका में भी लोकतंत्र है पर वहां पूंजीवादी व्यवस्था तथा व्यापक व्यवसायीकरण…
Read moreजल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?
भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित खेती, और जलवायु…
Read moreथरूर लाईन में-दिग्विजय के भाई को निकाला कांग्रेस कार्यालय में कौन लगाऐगा ताला
पुष्पा-2 देखी क्या ? सच्चाई से कोसों दूर लेकिन बढ़िया मनोरंजन करने वाली पिक्चर। बड़ा मज़ा आया। इसमें एक मनोरंजक ‘अति’ दिखाई गयी कि एक एसपी ने जो पुष्पा का…
Read moreछत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के वैश्विक पर्याय थे पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे ,नमन |
गुदगुदाता हुआ हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य, अद्भुत रचनात्मक शैली के धनी अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे सबको रोता,बिलखता और आंसुओं से भीगता हुआ छोड़ गए। उनका आसामयिक निधन संपूर्ण…
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